आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन हुनर की चमक ने किया मंत्रमुग्ध—ओडिशा की पूरी टीम ने प्रस्तुत की अद्भुत संगीत साधना

धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-बांकी मोंगरा) नवयुवक गणेशोत्सव समिति, बांकी मोंगरा द्वारा हनुमान चौक में आयोजित भजन संध्या में ओडिशा से पहुंचे “जीवन नेत्रहीन भजन संध्या” के कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक भक्तिरस में डूबे रहे।

इस भजन संध्या की सबसे खास बात यह रही कि मंच पर मौजूद पूरी कलाकार टीम नेत्रहीन थी। भजन गायक-गायिका से लेकर सिंथेसाइजर, ऑक्टोपैड, तबला और ढोलक बजाने वाले सभी कलाकारों ने अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया। आंखों की रोशनी भले ही उनका साथ नहीं देती, लेकिन संगीत की साधना और आत्मविश्वास ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक कमी की मोहताज नहीं होती।

कलाकारों की शानदार गायन शैली और वाद्ययंत्रों पर उनकी जबरदस्त पकड़ देखकर श्रोता भावविभोर हो उठे। मंच से जब “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम”, “राम जी की निकली सवारी”, “तू प्यार का सागर है” सहित हिंदी, छत्तीसगढ़ी और उड़िया भजनों की प्रस्तुति हुई तो पूरा हनुमान चौक भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।


विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी भजन “मोर गांव के शीतला दाई, तोला बंदव...” ने स्थानीय श्रोताओं को खूब भावुक किया। भजनों की एक के बाद एक प्रस्तुतियों के साथ श्रोता तालियां बजाते, झूमते और भक्तिभाव में डूबे नजर आए।

प्रतिभा के आगे रोशनी भी फीकी

इस कार्यक्रम ने सिर्फ भक्ति का वातावरण ही नहीं बनाया, बल्कि समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। इन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया कि शरीर की सीमाएं प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास को रोक नहीं सकतीं। बिना देखे सुरों को साधना और वाद्ययंत्रों पर इतनी कुशलता हासिल करना उनकी वर्षों की साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।


नेत्रहीन कलाकारों की इस प्रेरणादायी प्रस्तुति ने बांकी मोंगरा के श्रोताओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम के समापन तक लोग कलाकारों की कला का भरपूर आनंद लेते रहे और उनकी प्रतिभा की सराहना करते नजर आए।