धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(महासमुंद) जब हौसले बुलंद हों और परिवार में एकजुटता की ताकत हो, तो बड़े से बड़ा संकट भी घुटने टेक सकता है। महासमुंद जिले के कोमाखान तहसील अंतर्गत ग्राम झिटकी में रविवार देर रात एक ऐसी ही हैरतअंगेज और रोंगटे खड़े कर देने वाली मिसाल देखने को मिली। जहाँ खूंखार तेंदुए के खौफ और अचानक हुए जानलेवा हमले के सामने एक परिवार ने डरकर भागने के बजाय एकजुट होकर ऐसा मोर्चा संभाला कि अंततः तेंदुए को जान बचाकर दुम दबाकर भागना ही पड़ा।

आधी रात घर में घुसा तेंदुआ, नींद में हुआ खूनी हमला

घटना रविवार देर रात की है। ग्राम झिटकी में सरजू यादव का परिवार गहरी नींद में सो रहा था, तभी एक आदमखोर तेंदुआ अचानक घर के अंदर घुस आया। चारों तरफ अंधेरा और सन्नाटा था, जिसका फायदा उठाकर तेंदुए ने सो रहे परिवार के सदस्यों पर अचानक झपट्टा मार दिया। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई।

भागे नहीं, सीना तानकर मौत के जबड़े से लड़ा परिवारसामने साक्षात मौत बनकर खड़ा आदमखोर तेंदुआ था, लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य ने पीठ नहीं दिखाई। डर के आगे घुटने टेकने के बजाय बुजुर्गों से लेकर नौजवानों ने एकजुट होकर तेंदुए से लड़ना चालू किया और जो हाथ लगा उसी से डटकर मुकाबला शुरू कर दिया। हमले में एक-एक कर परिवार के सभी 8 सदस्य घायल होते चले गए, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं टूटी।

लहूलुहान हालत में भी परिवार के सदस्यों ने अपनी जान की परवाह किए बिना एक-दूसरे को बचाने के लिए तेंदुए पर जोरदार जवाबी हमला करते रहे। पूरे घर में गूंजती ललकार और परिवार की इस चट्टानी एकता व बेखौफ बहादुरी के आगे आदमखोर तेंदुआ भी पस्त हो गया। आख़िरकार तेंदुए को उल्टे पांव वहां से भागना पड़ा।

बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर दिखाई अदम्य वीरता

 इस साहसिक संघर्ष में:

सरजू यादव (60 वर्ष)

उत्तरीबाई यादव (55 वर्ष)

जनकराम (40 वर्ष)

सुनीता यादव (34 वर्ष)

मनीष (18 वर्ष)

तुषार (15 वर्ष) सहित परिवार के कुल आठ सदस्य घायल हुए हैं। 15 और 18 साल के किशोरों ने भी जिस हौसले से आदमखोर का सामना किया, वह काबिले-तारीफ है।

चीख-पुकार सुन पहुंचे ग्रामीण, घायलों को अस्पताल पहुंचाया

मुकाबले के दौरान मचे भारी शोर और चीख-पुकार को सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से लहूलुहान सभी आठों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद आवश्यक वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण सभी को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल महासमुंद रेफर कर दिया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

इलाके में लगातार दूसरे दिन हमला, ग्रामीणों आक्रोश व वन विभाग की निगरानी

क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता से दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, झिटकी की इस घटना से ठीक एक दिन पहले पास के पंडरीपानी गांव में भी तेंदुए ने एक व्यक्ति पर हमला किया था। लगातार दो दिनों में दो बड़े हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने और तेंदुए को जल्द पकड़ने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची है और क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों पर निगरानी रख रही है।