कृष्णा पाण्डेय जिला ब्यूरो चीफ जीपीएम

(गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) वर्ष 2020 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) को नया जिला बनाए जाने के बावजूद शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला धनौली की पहचान आज भी पुराने रिकॉर्ड और बोर्डों तक सीमित नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्कूल का नाम दर्शाने वाला बोर्ड तक नहीं लगा है। परिसर के भीतर भी कहीं विद्यालय का नाम स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है, जिससे आगंतुकों और विद्यार्थियों को असुविधा होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में अब भी पुराने जिला प्रशासन से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। सूचना बोर्ड पर पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी आर.एन. हीराधार तथा पूर्व कलेक्टर का नाम अंकित है, जबकि जीपीएम जिले में वर्तमान अधिकारी कार्यरत हैं। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी इन जानकारियों का अद्यतन नहीं होना विभागीय लापरवाही की ओर संकेत करता है।

विद्यालय के प्राचार्य पर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राचार्य अक्सर शासकीय कार्यों के सिलसिले में विद्यालय से बाहर रहते हैं, जिससे विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन प्रभावित होता है। साथ ही कुछ शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।


स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जिला बनने के बाद शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार हुए हैं, लेकिन विद्यालय स्तर पर मूलभूत व्यवस्थाओं और प्रशासनिक अद्यतन पर अब भी गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में नामकरण बोर्ड लगाया जाए, पुराने सूचना बोर्डों को तत्काल अपडेट किया जाए तथा विद्यालय की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।