धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-बांकीमोंगरा) दोस्तों के साथ बिताए जाने वाले मौज-मस्ती के चंद पल किस तरह एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन सकते हैं, इसका दिल दहला देने वाला उदाहरण बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कटाईनार एनीकट (डेम) में देखने को मिला। पिकनिक मनाने गए 16 वर्षीय नरेश साहू की गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद हादसे ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि समाज और युवाओं के सामने आपात स्थिति में जिम्मेदारी और सूझबूझ को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

मौज-मस्ती के बीच पैर फिसलने से हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अयोध्यापुरी (जमनीपाली, थाना दर्री) निवासी नरेश साहू (उम्र लगभग 16 वर्ष, पिता फिरतू साहू) शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे अपने दो दोस्तों—अमित कुमार और आदित्य दास—के साथ मोटरसाइकिल (CG 12 AM 7519) पर सवार होकर नागिन भाठा/कटाईनार डेम पिकनिक मनाने गया हुआ था।


डेम के किनारे समय बिताते वक्त अचानक नरेश का पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। बहाव और गहराई अधिक होने के कारण वह संभल नहीं पाया और पानी में समा गया।

डर और घबराहट: जानकारी छुपाना साबित हुआ सबसे बड़ी भूल

हादसा होते ही साथ आए दोनों दोस्त बुरी तरह घबरा गए। होश फाख्ता होने के चलते वे सही समय पर किसी को मदद के लिए बुलाने के बजाय डर के मारे नरेश को वहीं छोड़कर घर लौट आए। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही कि डर की वजह से उन्होंने इस गंभीर घटना की सूचना न तो ग्रामीणों को दी और न ही परिजनों को।


शाम तक जब नरेश घर नहीं लौटा, तब परिजनों ने खोजबीन शुरू की। दोस्तों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तब जाकर उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया, जिसे सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

24 घंटे के बाद बरामद हुआ शव

घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के पिता फिरतू साहू अन्य लोगों के साथ रात करीब 9 बजे कटाईनार डेम पहुंचे, जहां पानी में नरेश की स्थिति देखकर तुरंत बांकीमोंगरा थाने को सूचित किया गया। पुलिस दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन रात का अंधेरा और जलस्तर अधिक होने के कारण तलाशी अभियान को स्थगित करना पड़ा।


अगले दिन शनिवार सुबह एनीकट का गेट खोलकर पानी का स्तर कम किया गया और गोताखोरों की मदद से 24 घंटे बाद नरेश का शव बाहर निकाला गया। शव मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

"इस हादसे से मिलने वाला जरूरी नैतिक सबक"

1. अपरिचित और गहरे जलस्रोतों से रहें दूर:

 डेम, एनीकट, नदियां और खदानें दिखने में शांत लग सकती हैं, लेकिन उनकी गहराई, फिसलन भरी काई और पानी का बहाव जानलेवा होता है। बिना सुरक्षा उपकरणों और तैराकी के ज्ञान के कभी भी ऐसे स्थानों के किनारे न जाएं।

2. आपातकाल में डरें नहीं, तुरंत मदद मांगें:

 किसी भी दुर्घटना के समय सबसे महत्वपूर्ण होते हैं पहले के कुछ मिनट (गोल्डन ऑवर)। यदि कोई साथी पानी में गिरता है या घायल होता है, तो डरकर भागने या बात छुपाने के बजाय तुरंत शोर मचाएं, स्थानीय ग्रामीणों, डायल 112 या परिजनों को सूचित करें। समय पर मिली मदद से जान बचाई जा सकती है।

3. छुपाना अपराध और पछतावे की वजह बनता है:

 गलती या हादसे के डर से सच छुपाने से संकट और विकराल हो जाता है। सच बोलने से राहत और बचाव कार्य समय पर शुरू हो सकते हैं।

4. अभिभावक रखें बच्चों पर नजर:

माता-पिता को भी अपने नाबालिग बच्चों की गतिविधियों और उनके जाने वाले स्थानों पर सजग निगरानी रखनी चाहिए, ताकि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना जोखिमों से समय रहते बचा जा सके।