धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)कुसमुंडा कोयला खदान क्षेत्र में शनिवार को एक बड़ा हादसा टल गया। नीलकंठ कंपनी का एक विशालकाय डंपर कार्य के दौरान ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया। सौभाग्य से उस समय लाइन में विद्युत आपूर्ति बंद थी, जिसके कारण डंपर चालक की जान बच गई और एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, नीलकंठ कंपनी के डंपर ऑपरेटर लकी यादव, पिता रामदास यादव, निवासी ग्राम पाली, खदान क्षेत्र में नियमित रूप से डंपर संचालन कर रहे थे। इसी दौरान डंपर का ऊपरी हिस्सा हाईटेंशन बिजली लाइन से जा टकराया। टक्कर के बाद बिजली का तार डंपर के पिछले टायरों और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि उस समय बिजली लाइन चालू होती तो डंपर में भीषण विस्फोट या करंट फैलने से चालक सहित आसपास मौजूद कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। बिजली सप्लाई बंद होने के कारण एक बड़ा अनर्थ टल गया।


इस घटना के बाद एसईसीएल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है, ऐसे में हाईटेंशन बिजली लाइनों की पर्याप्त ऊंचाई और नियमित सुरक्षा जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता, तो ऐसी घटना की नौबत नहीं आती।


घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को मौके पर बुलाया गया। डंपर में फंसे बिजली के तार को सुरक्षित तरीके से हटाने की कार्रवाई की गई। कर्मचारियों एवं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि खदान क्षेत्र में बिजली लाइनों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए तथा भारी वाहनों के मार्गों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं।


हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह हादसा खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था की गंभीर आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत करता है। यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।उपशीर्षक: खदान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, कर्मचारियों ने बिजली लाइनों की ऊंचाई बढ़ाने और सुरक्षा मानकों के पालन की उठाई मांग उठायी है ..