धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(बिलासपुर)छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई के निधन से प्रदेश सहित पूरे देश में शोक की लहर है। उनके निधन के साथ ही भारतीय लोककला जगत ने अपनी एक अमूल्य धरोहर को खो दिया है। उन्होंने अपनी अद्भुत गायन शैली, सशक्त प्रस्तुति और ओजस्वी अभिव्यक्ति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

तीजन बाई ने सीमित संसाधनों से संघर्षपूर्ण जीवन की शुरुआत की, लेकिन अपनी असाधारण प्रतिभा और अथक साधना के बल पर विश्वभर में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का परचम लहराया। उन्होंने अनेक देशों में महाभारत की कथाओं को पंडवानी में प्रस्तुति देकर भारतीय लोक परंपरा की समृद्ध विरासत से दुनिया को परिचित कराया।

उनकी कला और योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। उनके योगदान को सदैव भारतीय लोककला के स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।


तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से लोककला जगत में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। वे अपनी अमर प्रस्तुतियों, संघर्षपूर्ण जीवन और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के माध्यम से सदैव कला प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेंगी।


उनके निधन पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, कलाकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।