धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-कोरवी)ग्राम पंचायत कोरबी के छुईहापारा से मेन रोड तक बनने वाली सी.सी. सड़क एवं नाली निर्माण का मामला अब सवालों के घेरे में है। ₹44.63 लाख की लागत, 0.5 किलोमीटर सड़क और 07 मई 2026 की कार्य पूर्णता तारीख—ये तमाम जानकारियां निर्माण स्थल पर लगे साइन बोर्ड पर दर्ज हैं। लेकिन जब जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे तो विकास की चमकदार तस्वीर के पीछे की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई।

कागजों में सड़क पूरी, लेकिन धरातल पर सड़क नदारद! यही वह विरोधाभास है जिसने पूरे निर्माण कार्य की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक-एक बिंदु की जांच में सामने आ सकता है लाखों के भ्रस्टाचार एवं इसमें संलिप्त्ता का पूरा सच

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे एवं जिला सचिव महावीर यादव ने छुईहापारा से मेन रोड तक प्रस्तावित निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मौके पर न तो सी.सी. सड़क दिखाई दी और न ही नाली का निर्माण नजर आया। ग्रामीणों को आज भी कच्चे रास्ते, मिट्टी और दलदल के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है।

अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि ₹44.63 लाख की पूरी निर्माण प्रक्रिया का है।

साइन बोर्ड पर लाखों का विकास, जमीन पर सड़क और नाली गाय


निर्माण स्थल पर लगा साइन बोर्ड कार्य को पूर्ण दर्शाता है। बोर्ड पर कार्य की लागत और पूर्णता की तारीख तक अंकित है। लेकिन मौके की स्थिति इस दावे पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।


अगर सड़क और नाली बनी ही नहीं, तो कार्य पूर्ण कैसे घोषित हुआ?


क्या कार्य पूर्णता से पहले स्थल का तकनीकी निरीक्षण हुआ था?

क्या माप पुस्तिका में सड़क एवं नाली का निर्माण दर्ज किया गया है?

क्या निर्माण एजेंसी को भुगतान किया गया?

अगर भुगतान हुआ तो किस कार्य के आधार पर हुआ?

किस अधिकारी या तकनीकी अमले ने कार्य का सत्यापन किया?

और सबसे बड़ा सवाल—किस अधिकारी के प्रमाणन के बाद इस कार्य को पूर्ण माना गया?


इन सवालों के जवाब अब संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को सार्वजनिक करने चाहिए।


₹44.63 लाख का हिसाब मांग रही पार्टी


जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने कहा है कि यदि मौके पर निर्माण कार्य अधूरा है अथवा हुआ ही नहीं है और इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में उसे पूर्ण दर्शाया गया है, तो यह गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की जांच का विषय है।


पार्टी के जिला अध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे ने कहा कि जनता के विकास के लिए स्वीकृत राशि को सिर्फ साइन बोर्ड लगाकर कागजों में खर्च दिखाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में लापरवाही, गुणवत्ताहीन निर्माण, गलत सत्यापन या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।


विधायक से लेकर विभागीय अधिकारियों तक—सभी से जवाब की मांग


जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने क्षेत्रीय विधायक सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी के अधिकारियों से सीधे सवाल किया है कि ₹44.63 लाख के इस कार्य की वास्तविक प्रगति क्या है और 07 मई 2026 को कार्य पूर्ण होने का प्रमाण किस आधार पर जारी किया गया?


पार्टी का कहना है कि ग्रामीणों को विकास के नाम पर केवल बोर्ड दिखाकर उनके साथ छल नहीं किया जा सकता। जब ग्रामीणों को आज भी मिट्टी और दलदल से होकर गुजरना पड़ रहा है, तो सरकारी रिकॉर्ड में सड़क पूर्ण होने का दावा आखिर किस आधार पर किया गया?


दस्तावेज खुलेंगे तो सामने आएगा असली खेल!


जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी अब मामले को केवल मौके के निरीक्षण तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजों की जांच की दिशा में आगे बढ़ेगी। पार्टी संबंधित विभाग के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर स्वीकृति आदेश, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र एवं संबंधित निरीक्षण अभिलेखों की जांच की मांग करेगी।


इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो सकता है कि वास्तव में कितना काम हुआ, कितनी राशि का भुगतान हुआ और कार्य को पूर्ण घोषित करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही।


जांच में गड़बड़ी मिली तो आंदोलन की चेतावनी


जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय या तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


पार्टी ने यह भी चेतावनी दी है कि शिकायत के बाद भी धरातल पर गुणवत्तापूर्ण सड़क एवं नाली निर्माण शुरू नहीं हुआ और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ चरणबद्ध एवं पूर्णतः लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।


जनता का पैसा है, हिसाब देना ही होगा


जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का कहना है कि जनता को सड़क चाहिए, साइन बोर्ड नहीं। विकास चाहिए, कागजी खानापूर्ति नहीं।


₹44.63 लाख की सड़क अगर कागजों में पूरी है, तो जमीन पर कहां है?


यही सवाल अब छुईहापारा के ग्रामीणों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जनता के पैसे और विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इस मामले को हर लोकतांत्रिक मंच पर उठाया जाएगा।