पंडित देवशरण दुबे ने सुनाई भगवान गणेश के प्राकट्य की कथा, माता-पिता की आज्ञा और कर्तव्यनिष्ठा का दिया संदेश

देवेन्द्र कुमार खूटे रिपोर्टर कोरबा

(कोरबा) विश्व कल्याण की मंगल भावना के पावन उद्देश्य से निहारिका गणेशोत्सव समिति के तत्वावधान में महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका रोड में दस दिवसीय श्री गणेश कथा का शुभारंभ गणेश चतुर्थी के अवसर पर 14 सितंबर को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुआ। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक 23 सितंबर तक किया जाएगा।

कथा के प्रथम दिवस व्यासपीठ से सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के संस्थापक, भागवत एवं मानस मर्मज्ञ पंडित देवशरण दुबे ने मंगल कलश यात्रा एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने भगवान श्री गणेश के प्राकट्य, उनकी महिमा तथा प्रथम पूज्य बनने की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

पंडित देवशरण दुबे ने बताया कि भगवान गणेश ने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए अपने प्राणों की भी चिंता नहीं की। मातृ आज्ञा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और कर्तव्य के प्रति समर्पण ने उन्हें महान बनाया। उन्होंने कहा कि गणेश जी का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को माता-पिता एवं गुरु की आज्ञा का सम्मान करने, सत्य के मार्ग पर अडिग रहने तथा अनुशासन और त्याग को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति माता-पिता और गुरुजनों की आज्ञा का सम्मान करता है, उसे जीवन में सिद्धि, बुद्धि, यश और सफलता प्राप्त होती है। गणेश जी की बुद्धिमत्ता, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा ही उन्हें देवताओं में प्रथम पूजनीय बनाती है।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। समिति ने अंचलवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कथा का श्रवण करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।