यात्री प्रतीक्षालय बना निजी विज्ञापन का अड्डा, पहनावा रेडीमेड सेंटर ने लगाया दुकान का होर्डिंग; जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-बांकी मोंगरा) नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं और सरकारी संपत्तियों के रखरखाव को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुधवारी बाजार घुड़देवा टर्निंग के पास यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय को निजी प्रतिष्ठान के प्रचार का माध्यम बना दिया गया है। यहां पहनावा रेडीमेड सेंटर, बांकी मोंगरा द्वारा अपनी दुकान का होर्डिंग लगाया गया है।


आम जनता की सुविधा के लिए सरकारी धन से निर्मित यात्री प्रतीक्षालय क्या अब निजी दुकानों के प्रचार का ठिकाना बनेंगे? सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह व्यावसायिक उपयोग आखिर किसके संरक्षण या अनुमति से किया जा रहा है? यह सवाल अब स्थानीय नागरिकों के बीच नाराजगी का कारण बन रहा है।


जनता की सुविधा के लिए बना प्रतीक्षालय, निजी प्रचार ने घेरा स्थान

यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण राहगीरों और यात्रियों को धूप, बारिश से बचाने तथा बैठने की सुविधा देने के उद्देश्य से किया जाता है। लेकिन जब ऐसे सार्वजनिक स्थलों पर निजी प्रतिष्ठानों के विज्ञापन दिखाई देने लगें, तो सरकारी संपत्ति के वास्तविक उद्देश्य और उसके उपयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि बिना अनुमति होर्डिंग लगाया गया है, तो यह सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग से जुड़े नियमों की अनदेखी का मामला हो सकता है।

नगर पालिका प्रशासन की चुप्पी पर नाराजगी

सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका प्रशासन की भूमिका को लेकर है। क्या संबंधित अधिकारियों को इस होर्डिंग की जानकारी नहीं है? क्या निजी प्रतिष्ठान को विज्ञापन लगाने की अनुमति दी गई है? यदि अनुमति दी गई है, तो किस नियम और प्रक्रिया के तहत? और यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


नगर पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सार्वजनिक निर्माण कराना ही नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता और गरिमा बनाए रखना भी है। ऐसे मामलों में चुप्पी बरतने से नागरिकों के बीच प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

जवाबदेही तय हो, होर्डिंग की जांच और कार्रवाई कब?

अब नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा से अपेक्षा है कि वह मामले का संज्ञान लेकर होर्डिंग लगाने की अनुमति, संबंधित दस्तावेजों और विज्ञापन शुल्क की स्थिति की जांच करे। यदि बिना अनुमति सार्वजनिक संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग किया गया है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यात्री प्रतीक्षालय को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप रखा जाए।


सवाल सीधा है—सरकारी संपत्ति जनता की सुविधा के लिए है या निजी प्रतिष्ठानों के प्रचार के लिए? बांकी मोंगरा के नागरिक अब नगर पालिका प्रशासन से इस मामले में स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।