अमर भारद्वाज सह-स्टेट हेड छत्तीसगढ़ डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा) एसईसीएल की कुसमुंडा कोयला खदान में डीजल चोरी की कथित घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, रात करीब 8 बजे खदान क्षेत्र में एसईसीएल के डोजर से खुलेआम डीजल चोरी करते हुए कुछ लोग दिखाई दिए। इस घटना ने खदान परिसर में निगरानी और सुरक्षा की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

बताया जा रहा है कि खदान की सुरक्षा के लिए त्रिपुरा कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुरक्षा व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि खदान परिसर में इस तरह डीजल चोरी की घटनाएं हो रही हैं, तो यह प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसी दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सवाल यह है कि सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी और निगरानी के बीच इस तरह की घटना कैसे हो रही है?

एसईसीएल की भारी मशीनों में इस्तेमाल होने वाला डीजल कंपनी के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। यदि चोरी की घटनाएं लगातार होती हैं, तो इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसकी पुष्टि जांच और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही हो सकेगी।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि डीजल चोरी के पीछे आखिर किसका हाथ है? क्या सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरती जा रही है या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

एसईसीएल प्रबंधन को मामले की जांच कराकर सीसीटीवी फुटेज, डीजल की खपत के रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही, दोषियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि खदान में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।