धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)घरों से निकलने वाला अनुपयोगी प्लास्टिक कचरा अब कोरबा जिले के दूरस्थ गांवों की सड़कों को मजबूती देगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत जिले में लगभग 162 किलोमीटर लंबी 55 सड़कों का निर्माण स्वीकृत हुआ है। इन सड़कों को बनाने में डामर के साथ लगभग 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना को बढ़ावा देगी, बल्कि स्वच्छता कार्य से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बनेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि ये सड़कें कोरबा, करतला, पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार की जाएंगी, जहां वर्तमान में मिट्टी संबंधी प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। इन पक्की सड़कों से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। कलेक्टर ने कहा कि प्लास्टिक कचरे का समुचित उपयोग ग्रामीण विकास के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का बड़ा अवसर है। उन्होंने निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों के अनुरूप प्लास्टिक और फ्लाईएश के उपयोग को प्राथमिकता देने तथा संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं।

644 महिलाओं के परिश्रम को मिलेगा आर्थिक संबल

नगर निगम कोरबा क्षेत्र के लगभग 62 हजार घरों से प्रतिदिन कचरा संग्रहण करने का कार्य स्व-सहायता समूहों की 644 महिलाएं करती हैं। रोजाना एकत्र होने वाले करीब 155 टन कचरे में 4 से 5 टन प्लास्टिक शामिल रहता है। शहर के 16 एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) केंद्रों में सूखे और गीले कचरे की छंटाई की जाती है। अब सड़क निर्माण की तकनीकी जरूरतों के अनुसार उपयुक्त प्लास्टिक की छंटाई और आपूर्ति होने से इन महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता सी. एस. तंवर के अनुसार, 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक की मांग का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जा चुका है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्लास्टिक को डामर के साथ मिलाकर उपयोग में लाया जाएगा, जिससे पारंपरिक डामर की खपत में भी बचत होगी और सड़कों का खुला प्लास्टिक प्रदूषण कम होगा।