ऐ ज़िंदगी---

जाने कितने रंग दिखाती ।

कभी हँसाती, कभी रुलाती। 

कभी दिन में तारे दिखलाती।

कभी खुशियों की बारिश है लाती,

कभी गमों का दरिया भर जाती है।

अच्छे - बुरे कर्मों का हिसाब 

किस्तों में कर जाती। ऐ ज़िंदगी--- 


कभी आवाक्- सी है ज़िंदगी, 

तो कभी बेबाक - सी है ज़िंदगी।

ज़ख्म भी देती है ज़िंदगी, 

मरहम भी लगाती है ज़िंदगी।

शांति और बेबाकपन की 

खुली किताब बन जाती।ऐ ज़िंदगी--- 


कभी आश है ज़िंदगी 

तो कभी विश्वास है ज़िंदगी। 

ज़िंदगी खेल भी है 

तो जंग भी है ज़िंदगी।

आशा और विश्वास की 

पराकाष्ठा बन जाती। ऐ ज़िंदगी ---

जाने कितने रंग दिखाती।


           हेमलता जायसवाल

           झारसुगुडा,ओड़िशा