धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)एसईसीएल के गेवरा खदान विस्तार विस्तार के लिए अधिग्रहित ग्राम नरईबोध के नए पुनर्वास ग्राम का विकास कार्य एस ई सी एल द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से करवाया जा रहा है । यह नया पुनर्वास ग्राम अपने निर्माण से पूर्व ही चर्चा का विषय बना हुआ है । दरअसल यह विकास कार्य पहले से मौजूद एक ओवर –बर्डन (मिट्टी) डंप के तलहटी में सटाकर बनाया जा रहा है जिससे भविष्य में इस पूरे पुनर्वास ग्राम में मिट्टी धसकने का खतरा बना रहेगा । ऐसी ही एक घटना दो माह पूर्व में जटराज ग्राम में घटित हो चुकी है जिसमें बगल के मिट्टी डंप का मलबा ढह कर सड़क पर आ गया था । हालांकि आसपास बसाहट क्षेत्र न होने के कारण उस मामले में कोई जानमाल की हानि नहीं हुई थी । परंतु नरईबोध के मामले में तो एक पुनर्वास ग्राम ही बसना है । 

भूविस्थापितों को दिए जानी वाली मूलभूत सुविधाओं में गुणवत्ता की कमी और भ्रष्टाचार की गंध कलेक्टर से शिकायत

एस ई सी एल की भूमि–अधिग्रहण नीति में भूविस्थापितों को जमीन के बदले बसावट दिए जाने का प्रावधान है । पुनर्वास ग्राम के सभी आधारभूत संरचना निर्माण और सुविधानों की जिम्मेदारी भू अर्जन करने वाले कंपनी की होती है । परंतु नरईबोध पुनर्वास ग्राम में एस ई सी एल की कार्यशैली संदेहास्पद नजर आती है । ओवर बर्डन डंप के बगल में बनाए जाने के साथ साथ मिट्टी के कार्य में कॉम्पैक्शन की कमी की शिकायत कलेक्टर से की गई है । 

हालांकि इसी वर्ष मई–जून में भी ग्रामीणों की विभिन्न शिकायतों पर संज्ञान लेकर कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जुलाई माह में इस कार्य में रोक लगाई थी । जिसके बाद पिछले माह सितंबर में कार्य पुनः प्रारंभ किया गया था । जिसके उपरांत अब गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर कलेक्टर से शिकायत की गई है । एस ई सी एल की इस लापरवाही पर प्रशासन क्या रुख लेता है यह देखना होगा । 

क्यों काटी गई ओबी डंप की मिट्टी ?

पुनर्वास ग्राम के विकास कार्य के लिए जारी निविदा में ठेका कंपनी को एक किलोमीटर की दूरी से 1,65,650 क्यूबिक मीटर और 3,36,600 क्यूबिक मीटर मिट्टी 10 किलोमीटर से लाना था जिसका भुगतान 178.69 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर के हिसाब से करना था । एस ई सी एल और ठेका कंपनी पर आरोप है कि ठेका कंपनी ने प्रभारी अभियंता से मिलीभगत कर पूरी मिट्टी की मात्रा ही बगल वाले ओबी डंप से पूरी कर दी है जिसकी दूरी एक किलोमीटर भी नहीं है । 

सवाल यह उठता है कि जब बगल के डंप से ही मिट्टी उठाया जाना था तो प्राक्कलन में 10 किलोमीटर के दर से राशि क्यों भुगतान की जा रही थी । ऐसे में शुरू से ही इस निविदा की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है । 

सबसी बड़ी समस्या,संघनन ( कॉम्पैक्शन) की कमी ।भविष्य के निर्माण पर खतरा

 सिविल कार्यों के निर्माण में मिट्टी भराव के कार्य में संघनन एक अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है । जिसमें मिट्टी को 20 से 30 की पतली परतों में जमाकर उसको मजबूती के लिए पानी डालने उपरांत रोलर अथवा हैमर से दबाना होता है । एक परत में यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अगली परत बिछाई जाती है । आरोप है कि नरईबोध के इस साइट में ठेकेदार ने यह प्रक्रिया का पालन नहीं किया और सीधे 6–7 मीटर के पहाड़ खड़े कर दिए जिससे भविष्य में बनने वाले सी सी रोड , नाली , कल्वर्ट , भवन आदि में दरार पड़ने और टूटने की संभावना बनी रहती है । 

जिससे भूविस्थापितों को प्रदान किए जानी वाली सुविधाओं को लेकर एस. ई. सी. एल. की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं ।

की गई पेड़ों की कटाई । किसने दी अनुमति ?

पुनर्वास ग्राम के विकास कार्य के लिए बेतरतीब पेड़ों को काटा गया है जिसके लिए वन विभाग द्वारा किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी । सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ओवर बर्डन डंप से भी पेड़ों की कटाई कर मिट्टी को निकाला गया है । जिससे ढलान की मिट्टी और ढीली हो गई है । 

पहले अपात्र फिर पात्र फिर टेंडर के सबसे कम बोलीकर्ता; निविदा प्रक्रिया ही संदेहास्पद

पुनर्वास ग्राम के विकासकार्यों के निविदा में  8 कंपनियों ने भाग लिया था जिसमें तकनीकी स्तर पर वर्तमान ठेका कंपनी आरकेटीसी–कीस्टोन जे वी सहित चार अन्य कंपनियों को भी अपात्र घोषित कर दिया गया था । जिसके बाद आरकेटीसी– कीस्टोन जेवी ने निविदा के दोनों स्वतंत्र बाह्य मॉनिटर (आई ए एम) के पास अपील की थी । अपील में दोनों स्वतंत्र मॉनिटर ने पात्र होना पाया था । जिसके बाद की फायनेन्शियल बीड प्रक्रिया में में आरकेटीसी– कीस्टोन जेवी को सबसे कम बोली लगाने वाला बताया गया । 

परंतु पहले की तकनीकी स्तर पर अपात्र घोषित करने वाले अधिकारी पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई । ऐसे में पूरी निविदा प्रक्रिया ही संदेहास्पद बन जाती है । 

भूविस्थापितों के पुनर्वास से संबंधित मामलों में गंभीरता से कार्य करे एस ई सी एल – शेत मसीह

पूरे मामले में शिकायतकर्ता एवं पर्यावरण विभाग के सांसद प्रतिनिधि शेत मसीह का कहना है कि कम से कम भूविस्थापितों से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े मामलों में एस ई सी एल को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से कार्य करना चाहिए । पुनर्वास ग्राम नरईबोध के विकास एवं निर्माण कार्य में कई प्रकार की तकनीकी खामियां हैं जिससे भविष्य का यह पुनर्वास ग्राम प्रभावित रहेगा । मामले में जिला प्रशासन को जांच और उचित कार्यवाही करनी चाहिए ।