अमर भारद्वाज सह-स्टेट हेड छत्तीसगढ़ डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा) कोरबा-दर्री मार्ग के नए पुल पर 17 मवेशियों की मौत/घायल होने की घटना के बाद गौवंश सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। गौशाला संचालकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण से संबंधित कानून और कार्रवाई के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन सड़क दुर्घटना, करंट, लावारिस हालत या संदिग्ध मौत की स्थिति में मालिक की पहचान और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और प्रभावी होनी चाहिए।


पशु संरक्षण से जुड़े लोगों ने गौवंश की अनिवार्य डिजिटल टैगिंग और यूनिक पहचान संख्या की मांग उठाई है। इससे पशु के मालिक, स्वास्थ्य, टीकाकरण और स्थान की जानकारी दर्ज की जा सकेगी। दुर्घटना या मौत की स्थिति में पहचान कर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। यह व्यवस्था पशु चोरी और अवैध परिवहन पर नियंत्रण में भी सहायक हो सकती है।


गौशालाओं में भी डिजिटल रिकॉर्ड से पशुओं की संख्या, आगमन, मृत्यु और स्थानांतरण का पारदर्शी हिसाब रखा जा सकता है। इससे सरकारी सहायता प्राप्त गौशालाओं में वास्तविक पशु संख्या का सत्यापन संभव होगा।


गौवंश संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि संरक्षण व्यवस्था केवल वध या अवैध परिवहन तक सीमित न रहकर पशु के जीवन, उपचार, दुर्घटना और मृत्यु की जांच तक विस्तारित होनी चाहिए। यदि विशेष दर्जे की पहल होती है तो उसके साथ बजट, चिकित्सा, टैगिंग और जवाबदेही की ठोस व्यवस्था भी जरूरी है।


सवाल यही है कि क्या मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है, या जन्म से मृत्यु तक प्रत्येक गौवंश की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली नई व्यवस्था की जरूरत है?