धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)करीब दो दशक से दर्शकों का मनोरंजन कर रही 'धमाल' फ्रेंचाइजी अपने चौथे भाग 'धमाल 4' के साथ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आई है। निर्देशक इंद्र कुमार ने इस बार भी वही पुराना लेकिन पसंदीदा फॉर्मूला अपनाया है—खजाने की तलाश, गलतफहमियां, अजीब हालात और भरपूर कॉमेडी।

फिल्म की कहानी कई किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक रहस्यमयी खजाने की खोज में निकलते हैं। जो सिर्फ एक आदमी को ही मिल सकता है इसके बाद शुरू होता है मजेदार घटनाओं, गलतफहमी, जंगल, जंगली जानवरों और जबरदस्त ट्विस्ट से भरा सफर, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।


अभिनय की बात करें तो अजय देवगन अपनी गंभीर लेकिन शानदार कॉमिक टाइमिंग से प्रभावित करते हैं, जबकि रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी की तिकड़ी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद के हिस्से भले ही सीमित दृश्य आए हों, लेकिन उन्होंने फिल्म के ग्लैमर और हल्के-फुल्के माहौल को बनाए रखने में अच्छा योगदान दिया है।


निर्देशक इंद्र कुमार ने फिल्म को पूरी तरह फैमिली एंटरटेनर बनाया है। कहानी में कोई गहराई नहीं है, लेकिन कॉमेडी, तेज रफ्तार और लगातार आने वाले पंचलाइन दर्शकों को बोर होने का मौका नहीं देते। बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के मनोरंजन को और बेहतर बनाते हैं।

संगीत भी फिल्म की खासियतों में शामिल है। बैकग्राउंड स्कोर कॉमिक दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है। फिल्म के गीत 'साड़ी' और 'चटनी' पहले ही सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके हैं और फिल्म में भी अच्छा मनोरंजन करते हैं।


अगर आप लॉजिक नहीं, बल्कि खुलकर हंसना चाहते हैं, तो 'धमाल 4' आपके लिए शानदार विकल्प है। यह एक हल्की-फुल्की, मनोरंजक और परिवार के साथ देखने लायक कॉमेडी फिल्म है, जो शुरुआत से अंत तक हंसी का डोज़ देती है।