धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)गृहस्थी और खेती-किसानी की दोहरी जिम्मेदारियों के बीच परिवार की आजीविका को सशक्त बनाने का सपना देखने वाली ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कोरबा जिले के ग्राम नकटीखार की निवासी श्रीमती एलिजाबेथ मिंज ने मत्स्य पालन की नवीनतम 'बायोफ्लॉक तकनीक' को अपनाकर अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया तैयार किया है।

योजना से मिला आधुनिक तकनीक का साथ

परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मिंज लंबे समय से आय का नया विकल्प तलाश रही थीं। मत्स्य पालन विभाग के संपर्क में आने पर उन्हें 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने योजना के अंतर्गत बायोफ्लॉक टैंक की स्थापना के लिए आवेदन किया। विभागीय सहयोग और स्वीकृति मिलने के बाद उनके लिए आधुनिक मत्स्य पालन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कम पानी और सीमित जगह में अधिक लाभ

बायोफ्लॉक तकनीक पारंपरिक मछली पालन की तुलना में कहीं अधिक किफायती और प्रभावी मानी जाती है। इसमें बेहद कम स्थान और सीमित पानी की आवश्यकता होती है, जिससे छोटे और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए भी घर के पास ही मछली पालन संभव हो जाता है। इस विधि से पानी की बर्बादी रुकेगी और उच्च गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त होगा।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

एलिजाबेथ मिंज की यह पहल केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है। नई तकनीक को सीखने की ललक और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए उठाया गया उनका यह कदम क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।