भोलाशंकर रिपोर्टर कुसमुंडा कोरबा

(कोरबा)सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता गणपत शर्मा ने शिक्षक बोधराम निषाद एवं हरिदास मानिकपुरी के युक्तियुक्तकरण प्रकरण में कथित प्रशासनिक असमानता एवं नियमों के चयनात्मक अनुपालन का गंभीर मुद्दा उठाते हुए राज्य एवं केंद्र सरकार के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की है।


गणपत शर्मा ने कहा कि उपलब्ध विभागीय अभिलेखों, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर की नोटशीट, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी के प्रतिवेदनों तथा छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र दिनांक 05.03.2019 के अध्ययन से यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि समान परिस्थितियों वाले सभी शिक्षकों के मामलों में क्या एक समान मानदंड अपनाए गए थे।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार कुछ शिक्षकों को राहत प्रदान की गई, जबकि बोधराम निषाद एवं हरिदास मानिकपुरी के मामलों में अलग परिणाम सामने आया। उनका कहना है कि इन दोनों मामलों का तुलनात्मक एवं निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी प्रकरणों में नियमों का समान रूप से पालन हुआ या नहीं।


गणपत शर्मा ने बताया कि दोनों शिक्षकों ने जिला, संभाग एवं राज्य स्तर की युक्तियुक्तकरण समितियों के समक्ष उपलब्ध वैधानिक उपायों का उपयोग किया, किन्तु अपेक्षित राहत प्राप्त नहीं हुई। वर्तमान में संबंधित युक्तियुक्तकरण समितियाँ भंग हो चुकी हैं, जिसके कारण विभागीय स्तर पर कोई प्रभावी मंच उपलब्ध नहीं है।


उन्होंने यह भी कहा कि यदि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर ही तथ्यात्मक परीक्षण एवं त्रुटियों का निराकरण संभव है, तो कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से न्यायालय जाने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन का दायित्व है कि वह विभागीय स्तर पर ही निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कारणयुक्त निर्णय सुनिश्चित करे।


इस संबंध में मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, शिक्षा सचिव, कलेक्टर कोरबा तथा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को विस्तृत अभ्यावेदन एवं दस्तावेजी साक्ष्य प्रेषित किए गए हैं। इनमें उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच, उपलब्ध अभिलेखों का तुलनात्मक परीक्षण तथा यदि जांच में कोई प्रक्रिया संबंधी त्रुटि या नियमों का असमान अनुप्रयोग पाया जाए तो नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।


कोरबा जिले के समस्त मीडिया बंधुओं से विनम्र निवेदन

लोकहित एवं शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के दृष्टिकोण से इस महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से प्रकाशित एवं प्रसारित करने का कष्ट करें, ताकि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच हो सके और यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक त्रुटि हुई है तो उसका समयबद्ध एवं न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।