चंद्र कुमार निर्णेजक जिला ब्यूरो चीफ बिलासपुर

(बिलासपुर)युगाब्द 5128 पुरुषोत्तम मास ज्येष्ठ षष्ठी के पावन अवसर पर जे पी विहार स्थित सरिता, अभिषेक, प्रीति मिश्रा एवं आरना के निवास पर सतत् 209 वें सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा पाठ के उपरांत उपस्थित जनसमूह को हिंदुत्व में विज्ञान पर जानकारी देते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि हिंदू धर्म व हिंदुत्व को वास्तविक परिपेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। नदी को संस्कृत में सिंधु कहा जाता हैं। भारत में हिमालय से निकलने वाली बारह मासी नदियों का बाहुल्य होने से यह भूभाग सिंधुस्थान कहां जाता था। भाषा मुखसुख खोजती हैं। जैसे सप्ताह का हप्ता हुए वैसे ही कालांतर में यहीं अपभ्रंश होकर हिंदुस्थान हुआ तथा यहाँ रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति हिंदू कहलाये। 

धर्म का अभिप्रायः किसी भी पूजा पध्दति से नहीं होता। वरन यह करणीय अकरणीय की कसौटियों का मापदंड होता हैं। जैसे प्यासे को पानी पिलाना, गरीबों की मदद करना, रोगी, असहाय की सेवा करना मानव धर्म हैं।

अतः भारत मे रहने वाले प्रत्येक सह्रदय मानव हिंदू हैं। उनके पंथ पूजा पध्दति अलग अलग हो सकती हैं।

अब प्रश्न उठता हैं कि हिंदुत्व क्या हैं। तो हिंदुओ के प्रत्येक सद्गुण यथा नारी का सम्मान, सहअस्तित्व में विश्वास, सर्वे भवंतु सुखिनः, जिओ और जीने दो, सभी को अपने अपने तरीके से ईश पूजा करने देना। बड़ो का आदर करना। भारतीय संस्कृति व संस्कार को अक्षुण रखना आदि ही हिंदुत्व के सद्गुण हैं।

शुभमविहार मानस मंडली द्वारा आयोजित सतत सुंदरकांड की 209वे पाठ में अखिलानंद पांडेय, ललित हीरालाल गर्ग, अखिलेश द्विवेदी, ए के स्वर्णकार, प्रमोद अवस्थी, सुरेंद्र दुबे, भूपेंद्र यादव, विजय मिश्रा, संतोष तिवारी, सोहन सिंह ठाकुर सहित जे पी विहार के अनेकों धर्मनिष्ठ गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।