महंगी किताबों का खेल बंद करो! DEO को अंतिम चेतावनी, 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो कार्यालय घेरने का ऐलान

धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)निजी स्कूलों में महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों पर कथित आर्थिक बोझ डालने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कोरबा जिले के इंडस पब्लिक स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल, बीकन स्कूल स्कूल एवं जिले के दीपका कोरबा, बांकी मोंगरा, ढेलवाडीह, कुसमुंडा सहित अन्य निजी स्कूलों में NCERT की मानक पुस्तकों के स्थान पर महंगे निजी प्रकाशकों की किताबें लगाए जाने के आरोपों को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


मंगलवार को पार्टी के जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कोरबा को अंतिम चेतावनी सह स्मरण पत्र सौंपते हुए सात दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो DEO कार्यालय का उग्र घेराव किया जाएगा।

हर साल बदलती हैं किताबें, उठ रहे हैं सवाल

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने निजी स्कूलों की पुस्तक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि कई स्कूलों में हर वर्ष पुस्तकों में बदलाव कर दिया जाता है। पार्टी का तर्क है कि यदि किताबें हर साल नहीं बदली जाएंगी तो विद्यार्थी अपने सीनियर विद्यार्थियों अथवा अन्य बच्चों से पुरानी किताबें लेकर पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। ऐसे में नई किताबों की अनिवार्य खरीद का दबाव कम हो जाएगा।


पार्टी ने आरोप लगाया कि इसी व्यवस्था के चलते कुछ स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ किताबों की बिक्री का कारोबार भी फल-फूल रहा है। सवाल यह उठाया गया कि यदि पुरानी किताबों का आदान-प्रदान संभव हो जाए तो क्या स्कूलों में सजने वाली पुस्तकों की दुकानों का कारोबार प्रभावित नहीं होगा?

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित निजी स्कूलों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

40 दिन से जांच रिपोर्ट का इंतजार, शिक्षा विभाग पर भी सवाल

पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, 22 जून 2026 को इस मामले में मूल ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद DEO कार्यालय द्वारा 22 जुलाई 2026 को जांच समिति गठित कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का आरोप है कि सात दिनों में रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद 40 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जांच प्रतिवेदन अब तक सार्वजनिक अथवा उपलब्ध नहीं कराया गया। पार्टी ने इसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताते हुए जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है।

“अभिभावकों को लूट का जरिया नहीं बनने देंगे”

जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे और जिला सचिव महावीर यादव ने कहा कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत को व्यापार का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की कथित मनमानी से पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।


पार्टी ने मांग की है कि नियमों के विपरीत पुस्तकें थोपने वाले निजी स्कूलों की जांच की जाए, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाए तथा अभिभावकों को राहत दिलाई जाए।

सात दिन की मोहलत, फिर होगा घेराव

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने शिक्षा विभाग को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के मुताबिक इस अवधि में यदि जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई और नियम विरुद्ध कार्य करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो DEO कार्यालय का उग्र घेराव किया जाएगा।


पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह अभिभावकों के आर्थिक हित और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के मुद्दे से पीछे हटने वाली नहीं है।


इस दौरान जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे, जिला सचिव महावीर यादव, जिला संगठन मंत्री सुरेश पटेल तथा छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के जिला महामंत्री राकेश सूर्यवंशी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।