राजकमल अग्रवाल जिला ब्यूरो चीफ सारंगढ़-बिलाईगढ़

(सारंगढ़-बिलाईगढ़)स्वास्थ्य क्षेत्र में विभिन्न बीमारियों के अध्ययन के लिए समाजसेवियों का देहदान, अमूल्य योगदान है। इसी कड़ी में देहदान संकल्प करने वाले दोन्देखुर्द रायपुर निवासी 80 वर्षीय गणेश दास मानिकपुरी का बुधवार क़ो आकस्मिक निधन हो गया। मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जीवन के अंतिम चरण तक बनी रही। उन्होंने जीते-जी अपना पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज, रायपुर को देहदान करने का संकल्प लिया था और इसके लिए विधिवत सहमति-पत्र भी भर दिया था। उनका यह प्रेरणादायी निर्णय परिवार, समाज और नई पीढ़ी के लिए सेवा, विज्ञान और मानवता का अनुकरणीय संदेश छोड़ गया है। उनके निधन से परिवार, शुभचिंतकों तथा सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में रुचि रखने वालों में शोक व्याप्त है। वे प्रख्यात समाजसेविका स्वर्गीय अम्बा देवी के पति व जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी के पिता थे। गणेश दास मानिकपुरी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार, अनेक शुभचिंतक और समृद्ध सामाजिक- सांस्कृतिक विरासत छोड़ गए हैं। उनके निधन से समाज ने एक विद्वान, कर्मठ, सिद्धांतनिष्ठ और स्पष्टवादी व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी सादगी, सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।  


रामायण के प्रख्यात टीकाकार, गहन अध्येता एवं चिंतक गणेश दास मानिकपुरी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। वे अविभाजित मध्यप्रदेश में कर्मचारी नेता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे तथा इंटक के महामंत्री के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके थे। स्पष्टवादिता, निर्भीक व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण वे समाज में अत्यंत सम्मानित थे।


धार्मिक ग्रंथों, समाचार-पत्रों और साहित्यिक पुस्तकों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी। ग्रामीण विकास, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण उनके चिंतन के प्रमुख विषय रहे। वे आजीवन सादा एवं शाकाहारी जीवन के पक्षधर रहे तथा सभी प्रकार के नशे के कट्टर विरोधी थे।

उन्होंने समाज में नशामुक्ति के लिए अनेक जनजागरूकता अभियान चलाए। इसके साथ ही वे जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक आडंबर के मुखर विरोधी रहे तथा सामाजिक समरसता और वैज्ञानिक सोच के समर्थक थे।