देवेन्द्र कुमार खूंटे रिपोर्टर कोरबा

(कोरबा) महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका रोड स्थित गणेश पंडाल में सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति एवं निहारिका गणेशोत्सव समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘श्रीरामचरितमानस से मानव चरित्र निर्माण’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानस एवं भागवत मर्मज्ञ परम पूज्य पंडित देवशरण दुबे ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन में त्याग, कर्तव्य, संस्कार और माता-पिता के सम्मान का महत्व बताया।

पं. दुबे ने कहा कि रामायण में भगवान श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न का त्याग सबसे अधिक उपेक्षित रहा है। श्रीराम वनवास गए, लक्ष्मण उनकी सेवा में रहे और भरत ने नंदीग्राम में तपस्वी जीवन बिताया, वहीं शत्रुघ्न ने परिवार और राजकीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए मौन तपस्या की। बिना यश की अपेक्षा के कर्तव्य निभाना उनके चरित्र की विशेषता है।

भरत चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भरत त्याग, भक्ति और धर्मनिष्ठा के प्रतीक हैं। वहीं माता कैकेयी के प्रति क्रोधवश कठोर वचन कहने का प्रसंग यह सीख देता है कि माता का अपमान महापाप माना गया है। उन्होंने कहा कि माता प्रथम गुरु और ईश्वर का स्वरूप होती हैं, इसलिए हर व्यक्ति को माता-पिता का सम्मान और सेवा करनी चाहिए।

पं. दुबे ने ‘स्वयं गरल का पान किया, जग को अमिय पिलाया’ गीत के माध्यम से माता कैकेयी के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि कैकेयी ने श्रीराम के वनवास के निर्णय के कारण लोकनिंदा सहन की, लेकिन कथा के व्यापक उद्देश्य में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि कैकेयी को समझे बिना रामकथा अधूरी है।

कार्यक्रम में सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के कोरबा जिला शाखा प्रभारी डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। आयोजन की सफलता में समिति पदाधिकारियों, गणेशोत्सव समिति एवं अंचलवासियों का विशेष योगदान रहा।