बिलासपुर साइबर रेंज पुलिस की कार्रवाई, नकदी सहित कार, स्कूटी और दो मोबाइल जब्त

चंद्र कुमार निणे॔जक जिला ब्यूरो चीफ बिलासपुर

(बिलासपुर) च्वाइस सेंटर संचालकों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को थाना रेंज साइबर बिलासपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बिलासपुर सहित रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के लगभग 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया। अब तक सामने आए मामलों में ठगी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त एक बुलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

क्यूआर कोड लेकर खाते में ट्रांसफर कराते थे रकम

मामले की शुरुआत बिलासपुर के बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक (29), निवासी ग्राम खरकेना, थाना हिर्री की शिकायत से हुई। शिकायत के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से सेंटर पहुंचा। उसने फोन-पे के माध्यम से होने वाले लेन-देन के बदले नकद राशि देने की बात कही। संचालक की सहमति के बाद आरोपी ने सेंटर के क्यूआर कोड का फोटो अपने मोबाइल में लिया और वहां से चला गया। इसके बाद क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये का लेन-देन किया गया। अगले दिन संचालक के बैंक खाते पर होल्ड लगने के बाद उन्हें पता चला कि उनका खाता साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम के कारण रोका गया है। अन्य च्वाइस सेंटर संचालकों के व्हाट्सएप ग्रुप से उन्हें जानकारी मिली कि इसी तरह दूसरे संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है।

दोनों आरोपियों की भूमिका का खुलासा

शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 05/2026, धारा 318(4), 317(4) एवं 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश तेज की। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा वारदात करने के प्रयास में घूम रहा है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर अपराध करना स्वीकार किया।

पुलिस के मुताबिक, अंकित आहूजा अलग-अलग च्वाइस और सीएससी सेंटरों में जाकर संचालकों के क्यूआर कोड का फोटो अपने मोबाइल से साथी आशीष केवटवानी को भेजता था। इसके बाद आशीष क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि अंकित संचालक से उसके बदले नकद राशि लेकर निकल जाता था। बाद में जब संचालकों के बैंक खाते होल्ड हुए, तब उन्हें पता चला कि उनके खातों में आई रकम साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी रायपुर से एक साथ निकलकर अलग-अलग जिलों में वारदात को अंजाम देते थे।

रायपुर निवासी हैं दोनों आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित आहूजा (32), पिता राजेश आहूजा, निवासी कमल विहार, थाना मुजगहन, जिला रायपुर तथा आशीष केवटवानी (32), पिता मुरली केशवानी, निवासी प्रेमपार्क, महावीर नगर, थाना तेलीबांधा, जिला रायपुर के रूप में हुई है। विवेचना के दौरान अब तक करीब 45 पीड़ित संचालकों के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी पुलिस ने दी है। धोखाधड़ी की कुल रकम का अंतिम आकलन जांच के बाद स्पष्ट होगा।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और नोडल अधिकारी गणन कुमार नखाते के निर्देश पर तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर प्रकाश पाटले एवं उप पुलिस अधीक्षक रेंज साइबर संदीप सरकार के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप, आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।