24 जुलाई को ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा था ज्ञापन, मनोज कुमार बंजारे के निर्देश पर अगस्त में हुई मरम्मत, सितंबर में फिर जस के तस स्थिति

सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा) विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र के कोरबी से सरमा होते हुए रानी अटारी एवं विजय वेस्ट कोल माइंस की ओर जाने वाला सड़क मार्ग इन दिनों बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा है। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और गिट्टी बाहर निकल आई है। मौके की तस्वीरों में सड़क की जर्जर स्थिति साफ दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022 में करीब 23 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क खराब होने लगी और वर्तमान में कई हिस्सों में सड़क बेहद जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों ने सड़क की गुणवत्ता और मरम्मत व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

यह मार्ग क्षेत्र के करीब 150 गांवों और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बताया जा रहा है। इस सड़क से बस, सवारी ऑटो, दोपहिया वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं तथा स्थानीय व्यापारी प्रतिदिन आवागमन करते हैं। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

24 जुलाई को एसडीएम को सौंपा था ज्ञापन

सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने 24 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पोड़ी उपरोड़ा को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में कोरबी से सरमा तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों तथा कई स्थानों पर पुलिया क्षतिग्रस्त होने की समस्या का उल्लेख किया गया था।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया था कि सड़क की खराब स्थिति के कारण मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस, यात्री बसों, दोपहिया वाहन चालकों और विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। ज्ञापन में सड़क की तत्काल मरम्मत की मांग करते हुए 15 दिनों के भीतर मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई थी।

एसडीएम के निर्देश पर अगस्त में हुई मरम्मत

ग्रामीणों के अनुसार ज्ञापन के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनोज कुमार बंजारे के निर्देश पर अगस्त 2026 में सड़क की मरम्मत का कार्य कराया गया। मरम्मत के बाद कुछ समय के लिए सड़क की स्थिति में सुधार दिखाई दिया।


लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सितंबर आते-आते सड़क की स्थिति फिर जस की तस हो गई। वर्तमान में कई स्थानों पर दोबारा बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने तथा सड़क की गिट्टी उखड़ने से आवागमन में परेशानी बनी हुई है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि मरम्मत के कुछ ही समय बाद सड़क दोबारा खराब हो रही है तो मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और सड़क की वास्तविक स्थिति की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।


2016 के एसईसीएल पत्र में मरम्मत-संधारण का उल्लेख

इस मामले में उपलब्ध 10 मई 2016 के एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के पत्र में कोरबी–सरमा–रानी अटारी मार्ग के संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी गई थी।


पत्र में उल्लेख है कि मार्ग के 1 से 4 किलोमीटर तक मरम्मत/संधारण का कार्य एसईसीएल द्वारा अनुमति प्राप्त होने के बाद कराया जाएगा। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब तक इस मार्ग से कोयला परिवहन होगा, तब तक मार्ग की मरम्मत/संधारण का कार्य एसईसीएल द्वारा कराया जाता रहेगा।


पत्र में रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदानों से इस मार्ग से कोयला परिवहन होने का भी उल्लेख है। साथ ही मार्ग का उपयोग कोयला परिवहन के अतिरिक्त समीपस्थ ग्रामों/अंचलों तक पहुंचने के मार्ग के रूप में होने की बात भी दर्ज है।


ऐसे में पुराने दस्तावेज में मरम्मत-संधारण का उल्लेख होने और वर्तमान में सड़क की जर्जर स्थिति सामने आने के बाद सड़क के स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ रहा सड़क पर दबाव

ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर कोयला परिवहन से जुड़े भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिससे सड़क पर दबाव बढ़ रहा है।

ग्रामीणों का दावा है कि कई भारी वाहन बड़ी मात्रा में कोयला लेकर इस मार्ग से गुजरते हैं। हालांकि वाहनों की वास्तविक संख्या और उनके भार की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से किया जाना बाकी है।


एम्बुलेंस और स्कूली बच्चों को भी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का असर आम आवागमन के साथ-साथ आपात सेवाओं पर भी पड़ रहा है। मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एम्बुलेंस को भी गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण अस्पताल पहुंचने में परेशानी होने की बात ग्रामीणों ने कही है।


स्कूली छात्र-छात्राएं भी साइकिल और दोपहिया वाहनों से इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। गड्ढों के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहने की बात ग्रामीणों ने कही है।

स्थायी मरम्मत और तकनीकी जांच की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग, प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से सड़क की स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही जर्जर हिस्सों की तकनीकी जांच, सड़क की क्षमता तथा भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के प्रभाव का परीक्षण कराने की मांग भी की गई है।


ग्रामीणों का कहना है कि अगस्त में मरम्मत के बाद सितंबर में यदि सड़क फिर से खराब हो गई है तो केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क की वास्तविक समस्या का समाधान किया जाना जरूरी है, ताकि क्षेत्र के ग्रामीणों, विद्यार्थियों, मरीजों, यात्रियों और वाहन चालकों को राहत मिल सके।