सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़

(रायपुर)राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा आयोजित "स्व. हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह–2026" बुधवार को विमतारा, मधु पिल्ले चौक, शांति नगर, रायपुर में अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 250 उत्कृष्ट शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट भूमिका के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत किया गया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु द्विवेदी, प्रधान संपादक, हरिभूमि समूह ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि भारत का स्वर्णिम इतिहास इस बात का साक्षी है कि हमारे यहां गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। प्राचीन काल में राजा भी अपने गुरुओं के सम्मान के लिए हर प्रकार का त्याग करने को तत्पर रहते थे, क्योंकि शिक्षक ही राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं और कई स्थानों पर शिक्षकों की भूमिका को केवल एक कर्मचारी तक सीमित करने का प्रयास दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि समाज को इस विषय पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा कि जो शिक्षक आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करता है, उसे उसके कार्य के अनुरूप सम्मान और प्रतिष्ठा मिले। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायक और विचारणीय है कि शिक्षकों के सम्मान के लिए स्वयं शिक्षकों की संस्था आगे आकर राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा आयोजन कर रही है। यह केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा और शिक्षक के गौरव को पुनः स्थापित करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि "शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य ही नहीं गढ़ता, बल्कि राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और सभ्यता का निर्माण करता है। ऐसे समर्पित शिक्षकों का सम्मान पूरे समाज का सम्मान है। शिक्षा में नवाचार और मूल्यों का समन्वय ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का आधार बनेगा।"


समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पूर्णानंद मिश्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत ने कहा कि स्व. हरिवंश मिश्र के आदर्श, अनुशासन, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करती रहेगी।


संरक्षक मनोज वर्मा ने कहा कि सम्मानित शिक्षक समाज के वास्तविक प्रेरणास्रोत हैं। उनका समर्पण नई पीढ़ी को संस्कार, ज्ञान और राष्ट्रप्रेम की दिशा देता है तथा ऐसे आयोजनों से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है।


विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना है। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला यह सम्मान प्रत्येक शिक्षक को और अधिक उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा देता है।


समारोह में स्वर्गीय हरिवंश मिश्र, भूतपूर्व प्रधानपाठक के शिक्षा, अनुशासन एवं समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित अतिथियों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि उनके आदर्श सदैव शिक्षकों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।


कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामय उपस्थिति रही। सम्मानित शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के इस अभिनव प्रयास की सराहना की तथा इसे शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।


संस्था के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जितेन्द्र मिश्रा ने सभी अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "जब एक शिक्षक सम्मानित होता है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था, उसके विद्यार्थी और राष्ट्र का भविष्य सम्मानित होता है।" उन्होंने कहा कि यही भावना इस राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह की सबसे बड़ी विशेषता है।


कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन राष्ट्रीय महासचिव मोहन लहरी ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ l