विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े के सवाल पर खुला सरकार का रुख

राजकमल अग्रवाल जिला ब्यूरो चीफ़ सारंगढ़-बिलाईगढ़

(सारंगढ़-बिलाईगढ़)छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सारंगढ़ विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जाने पर राज्य सरकार ने सदन में अपना स्पष्ट रुख सामने रखा। सरकार के जवाब से यह साफ हो गया कि प्रदेश के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों को TET के मामले में किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी।


विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने सरकार से पूछा था कि जब शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, तो क्या राज्य सरकार अपनी नीति बनाकर शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत दे सकती है? साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका, वर्ष में दो बार TET परीक्षा आयोजित करने तथा पात्रता अंकों में छूट देने जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए।


स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन में दिए जवाब में सभी संभावनाओं को लगभग खारिज करते हुए कहा कि—


विभागीय TET परीक्षा आयोजित नहीं होगी।


सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की जाएगी।


राज्य में TET वर्ष में दो बार आयोजित नहीं होगी।


TET के उत्तीर्णांक में कोई छूट नहीं दी जाएगी।


सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार TET की अनिवार्यता यथावत लागू रहेगी।



सरकार के इस जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षकों को राहत देने, नियमों में संशोधन करने या राज्य स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के प्रति सरकार फिलहाल इच्छुक नहीं है।


विधानसभा में यह मुद्दा उठाकर विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने शिक्षक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सदन में प्रमुखता से रखा। वहीं सरकार के जवाब ने यह संदेश दिया कि TET के मुद्दे पर वर्तमान सरकार अपनी नीति बदलने के मूड में नहीं है।


राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि जब सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि शिक्षा के संबंध में राज्य स्तर पर नीति बनाई जा सकती है, तब भी शिक्षकों को राहत देने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में TET का मुद्दा प्रदेश की राजनीति और शिक्षक आंदोलनों का बड़ा विषय बन सकता है।