पगडंडी और कीचड़ के सहारे ग्रामीणों का आवागमन, आंगनबाड़ी व स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी

सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़ 

(कोरबा-पोड़ी उपरोड़ा) स्थान: ग्राम पंचायत बनिया, आश्रित ग्राम सेमरहा, विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) ग्राम पंचायत बनिया के आश्रित ग्राम सेमरहा में सड़क और पुलिया की समस्या ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। गांव से करीब 11 से 12 किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी कच्ची पगडंडी और मिट्टी के रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों के साथ-साथ आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों और स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

पुलिया बनी तो जगी थी उम्मीद, जुलाई में ही हो गई क्षतिग्रस्त

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2024 में नाले पर पुलिया का निर्माण पूरा हुआ था। पुलिया बनने से ग्रामीण काफी खुश थे और उन्हें उम्मीद थी कि बरसात में आवागमन की समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद जुलाई 2024 में पुलिया टूट गई।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया टूटने के बाद करीब दो वर्षों में इसकी कोई मरम्मत नहीं हुई है। वर्तमान में पुलिया के पाइप और टूटे हिस्से नाले में पड़े हैं और ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाले से होकर रास्ता बनाना पड़ रहा है।

निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण के दौरान पानी निकासी की व्यवस्था सही तरीके से नहीं की गई। उनका कहना है कि जहां नाले के पानी की निकासी के लिए पाइप होना चाहिए था, वहां पुलिया की दीवार बना दी गई, जबकि जहां साइड वॉल होनी चाहिए थी, वहां ऊंचाई पर पाइप लगा दिया गया। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

11-12 किलोमीटर सड़क नहीं, अधिकारियों का दौरा भी मुश्किल

ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक लगभग 11 से 12 किलोमीटर तक सड़क नहीं होने के कारण स्थिति बेहद खराब है। बारिश में पगडंडी मार्ग पर जगह-जगह कीचड़ और पानी भर जाता है। ऐसे में चार पहिया वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं होने के कारण अधिकारी भी गांव के दौरे पर आसानी से नहीं पहुंचते, जिससे गांव की समस्याएं संबंधित अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंच पातीं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की निगरानी भी प्रभावित होती है।

स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी के बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता

बारिश के मौसम में खराब रास्ते को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों तथा स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को इसी रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। कीचड़ और नाले के कारण बच्चों के आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि बच्चों की परेशानी को देखते हुए गांव तक जल्द से जल्द सड़क का निर्माण कराया जाए।

पुलिया की मरम्मत के साथ सड़क निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर टूटी पुलिया का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण, निर्माण कार्य की जांच तथा ग्राम से मुख्य मार्ग तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्या झेल रहे सेमरहा के लोगों को अब स्थायी समाधान चाहिए, ताकि बारिश के दिनों में उन्हें नाले और कीचड़ भरे पगडंडी मार्ग से आवागमन न करना पड़े।