सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा) पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम रोदे स्थित विद्युत सबस्टेशन में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सबस्टेशन में पर्याप्त स्टाफ और स्थायी जूनियर इंजीनियर (जेई) की तैनाती नहीं होने से 30 से 35 पंचायतों के हजारों उपभोक्ताओं को लगातार बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई दिनों से दिन में मेंटेनेंस के नाम पर 10 से 12 घंटे तक बिजली बंद रहती है, जबकि शाम को हल्की बारिश या मौसम बदलते ही एहतियात के तौर पर फिर से आपूर्ति रोक दी जाती है। इससे कई बार 24 घंटे में महज 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।


लगातार बिजली कटौती का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, आम जनजीवन और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी में लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली बाधित रहने से कोल्ड चेन पर निर्भर वैक्सीन के सुरक्षित रखरखाव पर भी खतरा मंडरा रहा है।


बारिश के मौसम में बिजली गुल रहने से जहरीले सांप और अन्य जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ जाता है। अंधेरे के कारण लोगों को बाहर निकलने में डर बना रहता है। क्षेत्र में हर वर्ष सर्पदंश के कई मामले सामने आते हैं, ऐसे में नियमित बिजली आपूर्ति को ग्रामीण सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।


जानकारी के अनुसार रोदे सबस्टेशन में केवल छह कर्मचारी और एक लाइनमैन के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यहां कोई स्थायी जेई पदस्थ नहीं है। लगभग 40 किलोमीटर दूर पसान और 30 किलोमीटर दूर बांगो से जेई समय-समय पर पहुंचकर व्यवस्था संभालते हैं। इतनी बड़ी सीमा वाले सबस्टेशन के लिए यह व्यवस्था अपर्याप्त मानी जा रही है।


गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में भी कर्मचारियों की कमी के बीच एक खराब ट्रांसफॉर्मर से तांबा चोरी का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अब भी कोरबी पुलिस कर रही है। इस घटना के बाद भी सुरक्षा और स्टाफ बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


ग्रामीणों ने रोदे सबस्टेशन में स्थायी जेई, अतिरिक्त तकनीकी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तत्काल नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर अधिकारी उपलब्ध रहेंगे तो बिजली रखरखाव बेहतर होगा, उपकरण सुरक्षित रहेंगे और उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा। अब देखना होगा कि विभाग इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देता है और रोदे क्षेत्र के लोगों को नियमित बिजली आपूर्ति कब तक मिल पाती है।