अमर भारद्वाज सह-स्टेट हेड छत्तीसगढ़ डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा-पाली)शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पाली विकासखंड मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर रंगोले और नर्सरीपारा के शासकीय स्कूल इन दावों की पोल खोल रहे हैं। यहां माध्यमिक शाला रंगोले और प्राथमिक शाला नर्सरीपारा एक ही परिसर में संचालित हैं, जहां कुल 93 बच्चे अध्ययनरत हैं।


वर्ष 2005-06 में निर्मित दोनों स्कूल भवन वर्तमान में बेहद जर्जर हो चुके हैं। प्राथमिक शाला के कमरों की छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और लोहे की जाली बाहर निकल आई है। दीवारों में गहरी दरारें हैं तथा बारिश के दौरान कमरों में पानी और सीलन की समस्या बनी रहती है। भवन की खतरनाक स्थिति को देखते हुए शिक्षकों ने करीब दो वर्ष पहले इसे बंद कर दिया। अब 29 बच्चों को वर्ष 2010 में बने अतिरिक्त कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई एक ही कमरे में होती है।


माध्यमिक शाला की स्थिति भी चिंताजनक है। कक्षाओं की छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में दरारें हैं और फर्श भी उखड़ चुका है। सुरक्षा के मद्देनजर माध्यमिक कक्षाओं की पढ़ाई बाहर शेड में कराई जा रही है।

सरपंच के प्रयास भी बेअसर

ग्राम सरपंच संतोष मेश्राम ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर नए प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवन निर्माण की मांग की। इसके अलावा ग्राम डोंगानाला में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव को भी लिखित आवेदन सौंपा गया। बावजूद इसके अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।


ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी है। उनका कहना है कि 93 बच्चे जर्जर भवनों के बीच अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब नए प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवनों का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई जरूरी है।