(गौरेला-पेंड्रा-मरवाही)छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर गहरे कानूनी और प्रशासनिक विवाद में घिर गई है। 14 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा 50% से अधिक के आरक्षण को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद प्रदेश भर के लाखों अभ्यर्थियों में हलचल मच गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के आधार पर अब याचिकाकर्ताओं ने शिक्षा विभाग और व्यापम से कड़े शब्दों में मांग की है कि तत्काल शुद्धि पत्र (Corrigendum) जारी कर 50% आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन करते हुए 2026 की शिक्षक भर्ती का संशोधित विज्ञापन निकाला जाये।
पूरा मामला 2023 की शिक्षक भर्ती से जुड़ा है, जिसे याचिकाकर्ता योगेंद्र मणि वर्मा और उनके साथियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बस्तर संभाग के जिलों में लागू किए गए स्थानीय आरक्षण ने एक बड़ा असंतुलन पैदा कर दिया था। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:
* सुकमा में 84%, बीजापुर में 75% और नारायणपुर में 71% तक सीटें आरक्षित कर दी गईं।
* सहायक शिक्षक के पद पर अकेले अनुसूचित जनजाति (ST) को 84% और शिक्षक के पद पर 61% आरक्षण दे दिया गया।
याचिकाकर्ता योगेंद्र मणि वर्मा ने बताया कि इस गलत आरक्षण व्यवस्था के कारण छत्तीसगढ़ की 70% आबादी (सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति) के योग्य उम्मीदवार अवसरों से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं।
'इंदिरा साहनी' केस और पेंडिंग SLP पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ' मामले का प्रमुखता से हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट है कि विशेष परिस्थिति को छोड़कर कुल आरक्षण 50% की सीमा से ऊपर नहीं जा सकता।
योगेन्द्र मणि वर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित SLP (18816-181817) में कोई स्टे (Stay) नहीं है। न्यायालय ने व्याख्या करते हुए कहा है कि केवल किसी SLP के पेंडिंग होने मात्र से 50% से अधिक आरक्षण वाली असंवैधानिक व्यवस्था को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इसके बावजूद व्यापम द्वारा लगातार खारिज हो चुकी संभागवार और जिलेवार आरक्षण नियमावली के तहत भर्तियां निकाली जा रही हैं।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें (WPS 7450/2026)
याचिकाकर्ताओं ने 2026 की वर्तमान शिक्षक भर्ती को भी WPS 7450/2026 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
* शिक्षा विभाग बिना किसी देरी के शुद्धि पत्र जारी करे।
* न्यायालय के निर्देशानुसार 50% आरक्षण लागू करते हुए 2026 की भर्ती का पुनः विज्ञापन जारी हो।
* 2023 की भर्ती में बचे हुए पदों पर फिर से काउंसलिंग शुरू कर योग्य उम्मीदवारों को पोस्टिंग दी जाए।
बीएड अभ्यर्थियों जैसा हो सकता है हाल: विभाग को चेतावनी
योगेंद्र मणि वर्मा ने शिक्षा विभाग को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर विभाग अब भी नहीं मानता है और मनमाने तरीके से भर्तियां करता है, तो भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद गलत तरीके से नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा। उन्होंने हाल ही में नौकरी से निकाले गए बीएड (B.Ed) अभ्यर्थियों का ताजा उदाहरण दिया, जिन्हें पहले न्यायालय के अंतरिम आदेशों के बीच नियुक्ति दे दी गई थी, लेकिन अंतिम फैसला आने पर उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए 50% रोस्टर के साथ नया विज्ञापन जारी कर प्रदेश के लाखों युवाओं को राहत देता है, या यह विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचता है।
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