चंद्र कुमार निर्णेजक जिला ब्यूरो चीफ बिलासपुर

(बिलासपुर)12 वें विश्व योग दिवस को यादगार बनाने हेतु माननीय प्रधानमंत्रीजी के निर्देश पर आयुष मंत्रालय एवं हैबिल्ड के सह संथापक व प्रख्यात योग प्रशिक्षक आईआईटीयन सौरभ बोथरा द्वारा विश्व के 169 देशों के एक करोड़ से अधिक लोगों को एक साथ शासकीय मापदंडों के अनुरूप ऑन लाईन योग व मेडिटेशन करा कर नया विश्व कीर्तिमान बनाया जाएगा। बिलासपुर के नियमित योगी एवं ऑल इंडिया पीएनबी पेंशनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ललित अग्रवाल भी सपरिवार पुनः विश्व कीर्तिमान में शामिल होंगे।

सात वर्ष पूर्व उनकी चार पीढ़ी तथा वर्तमान में तीन पीढ़ी एक साथ योग में शामिल हैं। भले दो परिजनों के विदा होने तथा दो नए सदस्यों के आगमन से संख्या यथावत हो, लेकिन एक पीढ़ी की अपूरणीय कमी खलती रहेगी । उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सबसे बड़े दिन 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित होना भारतीय संस्कृति व प्राचीन काल गणना को पुनर्जीवित, सम्मानित करने दिशा में पहला कदम हैं। कल सबसे बड़े दिन में सूर्य की किरणों को कुछ समय के लिए शरीर में प्रवेश अवश्य ही कराना चाहिए।

उन्होंने बताया कि योग के आठ अंग यथा यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, और समाधि के पूर्ण लाभ हेतु नियमित योग करना आवश्यक हैं। उन्होंने 12वें विश्व योग दिवस कि बधाइयाँ देते हुए बताया कि अक्सर हम लोग योग का अर्थ आसान-प्राणायाम समझते हैं। वस्तुतः योग ईश्वर प्राप्ति की हिंदुत्व आधारित वैज्ञानिक पद्धति है जिसे महर्षि पतंजलि ने संकलित एवं व्यवस्थित किया था। इस पद्धति को पतंजलि-कृत-अष्टांगयोग के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस पद्धति के निम्न आठ अंग हैं। 

1. यम 

पांच सामाजिक नैतिकता

(क) अहिंसा – शब्दों से, विचारों से और कर्मों से किसी को हानि नहीं पहुँचाना

(ख) सत्य – विचारों में सत्यता, परम-सत्य में स्थित रहना

(ग) अस्तेय – चोर-प्रवृति का न होना

(घ) ब्रह्मचर्य – दो अर्थ हैं:

• चेतना को ब्रह्म के ज्ञान में स्थिर करना

• सभी इन्द्रिय-जनित सुखों में संयम बरतना

(च) अपरिग्रह – आवश्यकता से अधिक संचय नहीं करना और दूसरों की वस्तुओं की इच्छा नहीं करना

2. नियम 

 पाच व्यक्तिगत नैतिकता 

(क) शौच – शरीर और मन की शुद्धि

(ख) संतोष – संतुष्ट और प्रसन्न रहना

(ग) तप – स्वयं से अनुशाषित रहना

(घ) स्वाध्याय – आत्मचिंतन करना

(च) ईश्वर-प्रणिधान – ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, पूर्ण श्रद्धा

3. आसन -योगासनों द्वारा शरीरिक नियंत्रण

4. प्राणायाम -श्वास-लेने सम्बन्धी खास तकनीकों द्वारा प्राण (सांसों) पर नियंत्रण

5. प्रत्याहार- इन्द्रियों को अंतर्मुखी करना

6. धारणा - एकाग्रचित्त होना

7. ध्यान -निरंतर ध्यान (परमात्मा का)

8. समाधि -आत्मा से जुड़ना- शब्दों से परे परम-चैतन्य की अवस्था- ईश्वर की प्राप्ति

विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में कल सुबह 5 बजे शनि मंदिर, राजकिशोर नगर, सुबह 6 बजे नेचर सिटी बड़ा मैदान, सकरी, सुबह 6.30 बजे बी आर गार्डन, बृहस्पति बाजार, सुबह 7 बजे उत्सव वाटिका, 36 मॉल के समीप सन टू ह्यूमन परिवार, बिलासपुर द्वारा बड़े जोरशोर से योग एवं प्रयोग किए जाएंगे।


ललित अग्रवालबिलासपुर