खेत के बीच करीब 30 फीट नीचे धंसी जमीन, न फेंसिंग न चेतावनी बोर्ड—बारिश के बीच बढ़ा खतरा

धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-बांकीमोंगरा)बांकी मोंगरा नगर पालिका क्षेत्र के बांकी बस्ती से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर शुक्रवार सुबह अचानक हुए बड़े भू-धसान ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। खेतों के बीच जमीन का एक बड़ा हिस्सा अपने मूल स्थान से करीब 30 फीट नीचे धंस गया, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों में भय का माहौल है।

सबसे गंभीर बात यह है कि घटना के बाद SECL के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे, स्थल का निरीक्षण किया और वापस लौट गए, लेकिन तत्काल सुरक्षा के ठोस इंतजाम नजर नहीं आए। घटना स्थल पर न तो फेंसिंग की गई है और न ही लोगों को खतरे से आगाह करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।

बारिश के बीच बढ़ सकता है भू-धसान का दायरा

क्षेत्र में लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच ग्रामीणों को आशंका है कि जमीन के धंसने का दायरा और बढ़ सकता है। भू-धसान क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर ग्रामीणों के मकान और आबादी स्थित है। ऐसे में यदि समय रहते सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में भू-धसान का क्षेत्र बस्ती की ओर बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


यदि आबादी क्षेत्र इसकी चपेट में आता है तो बड़े जान-माल के नुकसान की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


SECL की कार्रवाई पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद SECL प्रबंधन की ओर से मौके का निरीक्षण तो किया गया, लेकिन केवल निरीक्षण तक सीमित कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब घटना स्थल आबादी के इतने करीब है तो वहां तत्काल सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड और निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?


ग्रामीणों ने मांग की है कि भू-धसान वाले स्थान को तत्काल सुरक्षित किया जाए, आवश्यकतानुसार मिट्टी-पत्थर से भराव कराया जाए तथा पूरे क्षेत्र को मजबूत फेंसिंग से घेरकर आम लोगों का प्रवेश रोका जाए।


पहले भी हो चुकी हैं भू-धसान की घटनाएं

बांकी मोंगरा क्षेत्र में भू-धसान की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। पूर्व में भी इस क्षेत्र में कई बार जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बताया जाता है कि मोंगरा में लगने वाले साप्ताहिक बाजार को भी बार-बार होने वाली भू-धसान की घटनाओं के चलते वहां से हटाकर बांकी क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया था।


आखिर क्यों धंसती है बांकी क्षेत्र की जमीन?

बांकी मोंगरा क्षेत्र लंबे समय से भूमिगत कोयला खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है। क्षेत्र में क्रमशः 3-4 नंबर, सुराकछार, 2 नंबर, 5/6, 7/8 तथा 9/10 नंबर जैसी भूमिगत खदानों में कोयला उत्पादन किया गया।


जानकारों के अनुसार, इन भूमिगत खदानों में कोयला निकालने के लिए जमीन के नीचे लंबी सुरंगों और भूमिगत संरचनाओं का निर्माण किया गया था। कई खदानों में उत्पादन बंद होने के बाद खदानें बंद कर दी गईं, लेकिन भूमिगत खाली हिस्सों और पुरानी खनन संरचनाओं की स्थिति को लेकर आज भी सवाल उठते रहे हैं।


स्थानीय स्तर पर माना जाता है कि भूमिगत खाली स्थानों और समय के साथ जमीन की संरचनात्मक कमजोरी के कारण ऐसे क्षेत्रों में भू-धसान की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हालांकि, वर्तमान घटना के वास्तविक तकनीकी कारण का निर्धारण सक्षम तकनीकी एवं खनन विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


ग्रामीणों में दहशत, तत्काल सुरक्षा की मांग

भू-धसान की घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत है। लोगों का कहना है कि जब आबादी से इतनी कम दूरी पर जमीन का बड़ा हिस्सा अचानक करीब 30 फीट नीचे धंस सकता है, तो भविष्य में किसी बड़ी घटना की संभावना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।


ग्रामीणों की मांग है कि SECL प्रबंधन तत्काल भू-धसान क्षेत्र की तकनीकी जांच कराए, पूरे क्षेत्र की सुरक्षा ऑडिट कराए, फेंसिंग एवं चेतावनी बोर्ड लगाए और आवश्यकतानुसार सुरक्षित भराव की कार्रवाई करे।


फिलहाल आज की घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन घटना ने भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि SECL प्रबंधन इस घटना को महज निरीक्षण और खानापूर्ति तक सीमित रखता है या आबादी की सुरक्षा को देखते हुए कोई ठोस और स्थायी कदम उठाता है।