दिब्येन्दु मृधा संपादक डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा-बालको) कभी सुरक्षा को केवल शारीरिक शक्ति से जोड़कर देखा जाता था और महिलाओं को सुरक्षा की आवश्यकता वाले वर्ग के रूप में माना जाता था। लेकिन समय के साथ यह सोच बदल रही है। आज महिलाएं केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। यही बदलाव बालको के सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सीएसओसी) में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसे अब पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित शी-एसओसी (सिक्योरिटी हार्मनी एंड एक्सीलेंस) के रूप में विकसित किया गया है। यह रूढ़िवादी धारणाओं से आगे बढ़कर एक ऐसी आधुनिक सुरक्षा संस्कृति को दर्शाती है, जिसमें शारीरिक शक्ति से अधिक योग्यता, सतर्कता, तकनीकी दक्षता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को महत्व दिया जाता है।


बालको का सीएसओसी कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह केंद्र दिन-रात, पूरे सप्ताह लगातार संचालित रहता है। संयंत्र परिसर में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, सुरक्षा अलर्ट का विश्लेषण, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित समन्वय, सुरक्षा टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना और महत्वपूर्ण निर्णयों में सहयोग जैसी सभी जिम्मेदारियां अब महिलाओं की टीम निभा रही है। यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं की क्षमता, नेतृत्व और पेशेवर दक्षता पर संगठन के विश्वास का प्रतीक है।


औद्योगिक सुरक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे वातावरण में धैर्य, बारीकियों पर ध्यान, तार्किक सोच और बेहतर संवाद कौशल जैसी विशेषताएं बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। महिलाओं की भागीदारी इन सभी पहलुओं को और मजबूत बनाती है तथा सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाती है।


शी-एसओसी की प्रभारी वर्षा द्विवेदी बताती हैं कि बालको ने उन्हें सुरक्षा संचालन का नेतृत्व करने का अवसर और विश्वास दिया है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, नवीन तकनीकों और नियमित प्रशिक्षण के कारण उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ा है। उनके अनुसार, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने से निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई है और संगठन की महिला सशक्तिकरण की सोच ने उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। उनका कहना है कि महिलाएं भी सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व कर सकती हैं।


रेखा श्रीवास्तव का मानना है कि अब समय आ गया है कि सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं को लेकर बनी पुरानी धारणाओं को बदला जाए। उनके अनुसार, सुरक्षा केवल शारीरिक शक्ति का विषय नहीं है। इसमें सतर्कता, अनुशासन, ईमानदारी, प्रभावी संवाद और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं ने अपने कौशल, प्रशिक्षण और समर्पण के माध्यम से बार-बार यह सिद्ध किया है कि किसी भी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाने की क्षमता लिंग नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत से तय होती है।


पूजा टंडन का कहना है कि इस क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं, जो कुछ नया सीखने और बेहतर बनने का अवसर देती हैं। सीएसओसी में तकनीक और सुरक्षा संचालन के साथ काम करने का अनुभव उनके पेशेवर जीवन को और अधिक समृद्ध बना रहा है। उनके अनुसार, जब किसी आपात स्थिति में सही समय पर लिया गया निर्णय किसी बड़े जोखिम को टाल देता है, तब अपने कार्य की वास्तविक सार्थकता का एहसास होता है।


बालको का शी-एसओसी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि विविधता, समान अवसर और योग्यता पर आधारित कार्य संस्कृति किसी भी संगठन को अधिक सक्षम बनाती है। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित यह सुरक्षा नियंत्रण केंद्र न केवल उनकी क्षमता और नेतृत्व कौशल को नई पहचान देता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिलने पर महिलाएं किसी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को सफलता के साथ निभा सकती हैं। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की यह भागीदारी बदलती सोच, समावेशी कार्य संस्कृति और सशक्त नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है।