जिला शिक्षा अधिकारी ने दोनों प्रभारी बीआरसी को उनकी मूल संस्था के लिए किया कार्यमुक्त !

कृष्णा पाण्डेय जिला ब्यूरो चीफ जीपीएम 

(गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) शिक्षा विभाग ने वर्षों से चल रही 'जुगाड़ व्यवस्था' पर आखिरकार रोक लगा दी है। जिले में विकासखंड स्रोत समन्वयक (BRC) के रिक्त पदों पर स्थानीय स्तर पर दी गई अतिरिक्त जिम्मेदारियों को समाप्त करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने दो अलग-अलग आदेश जारी कर दोनों विकासखंड के प्रभारी के रूप में कार्यरत बीआरसी को उनकी मूल पदस्थ संस्था के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। अब इन पदों पर नियमित पदस्थापना राज्य शासन द्वारा किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।


लोक शिक्षण संचालनालय के संलग्नीकरण समाप्ति के निर्देशों के पालन में जारी आदेश क्रमांक 1970 और 1971, दिनांक 20/07/2026 के तहत पेंड्रा और मरवाही दोनों विकासखंडों में बीआरसी की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।


आदेश के अनुसार पेंड्रा विकासखंड में बीआरसी का प्रभार संभाल रहे रामकुमार बघेल से जिम्मेदारी वापस लेकर उन्हें मूल पदस्थ संस्था के लिए कार्यमुक्त करते हुए पेंड्रा के विकासखंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र नाथ चंद्रा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।


वहीं मरवाही विकासखंड में पूर्व में तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा पेंड्रा विकासखंड में पदस्थ प्रधान पाठक अजय राय को दी गई BRC की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी समाप्त करते हुए उन्हें मूल पदस्थ संस्था के लिए कार्यमुक्त करते हुए अब यह प्रभार मरवाही के विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजय वर्मा को अतिरिक्त ज़िम्मेदारी के रूप में सौंपा गया है।


शिक्षा विभाग के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से रिक्त पदों पर संलग्नीकरण और स्थानीय व्यवस्थाओं के सहारे काम चलाया जा रहा था। अब दोनों विकासखंडों में बीआरसी का प्रभार संबंधित बीईओ को सौंप दिया गया है और संकेत स्पष्ट हैं कि रिक्त बीआरसी के पदों पर नियमित पदस्थापना राज्य शासन के स्तर से की जाएगी।


20 जुलाई 2026 को जारी दोनों आदेशों की प्रतिलिपि लोक शिक्षण संचालनालय, कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग तथा संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है। शिक्षा विभाग के इस कदम से जिले में लंबे समय से चली आ रही वैकल्पिक प्रभार व्यवस्था एवं संलग्नीकरण पर अब रोक लग गई है।