धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)छत्तीसगढ़ की विष्णु देव की सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में स्व-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बिहान योजना से जुड़कर महिलाएं अपनी मेहनत, हुनर और आधुनिक कृषि तकनीक के जरिए आजीविका का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम बेला की जया राठिया ने सब्जी उत्पादन के माध्यम से अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंचाकर ‘लखपति दीदी’ बनने की मिसाल कायम की है।


जया राठिया वर्ष 2017 में बिहान योजना से जुड़ीं और मड़वारानी स्व-सहायता समूह का हिस्सा बनीं। समूह में कुल 11 सदस्य हैं। समूह से जुड़कर उन्होंने नियमित बचत और ऋण गतिविधियों में भाग लिया तथा समूह से मिले ऋण और सहयोग का उपयोग अपनी आजीविका को मजबूत करने में किया।


सब्जी उत्पादन को आय का प्रमुख साधन बनाते हुए जया ने अपनी बाड़ी में ड्रिप सिंचाई विधि को अपनाया। उनकी बाड़ी में बरबट्टी, खीरा और करेला जैसी सब्जियों की फसल लहलहा रही है। आधुनिक सिंचाई तकनीक से उत्पादन कर वे तैयार सब्जियों को स्थानीय मंडी में बेचती हैं, जिससे उन्हें नियमित आमदनी हो रही है।


सब्जी उत्पादन और स्व-सहायता समूह की गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय अब एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने न केवल उनके परिवार को मजबूत किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है। उनकी सफलता ने उन्हें गांव में ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान दिलाई है।


अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग को देते हुए जया राठिया ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और समूह की ताकत से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता मिला है। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से सक्षम हैं और दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


बिहान योजना, स्व-सहायता समूह का सहयोग, आधुनिक कृषि तकनीक और निरंतर मेहनत का यह संगम ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। जया राठिया की कहानी इस बात का उदाहरण है कि मेहनत और सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बना सकती हैं।