अमर भारद्वाज सह-स्टेट हेड छत्तीसगढ़ डीएम इंडिया न्यूज़

(गेवरा-कोरबा) एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के प्रभावित गांवों उमेंदीभाठा, मनगांव, रलिया और नरईबोध के भू-विस्थापित ग्रामीणों एवं महिलाओं ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार आवेदन, निवेदन, ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। प्रबंधन के कथित अड़ियल रवैये से नाराज ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

भू-विस्थापितों ने एसईसीएल गेवरा के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सात दिनों के भीतर लिखित कार्रवाई नहीं होने पर 12 अक्टूबर 2026 से एसईसीएल गेवरा कार्यालय, खदान परिसर एवं मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम किया जाएगा।

बिना सहमति खुदाई और ब्लास्टिंग से मकानों में दरार का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि निजी कंपनियों द्वारा ग्रामसभा के प्रस्ताव एवं लिखित सहमति के बिना ग्रामीणों की बची हुई जमीन और गांव की सीमाओं में जेसीबी व पोकलेन मशीनों से खुदाई कराई जा रही है। उनका कहना है कि खदान गांवों से महज 100 से 200 मीटर की दूरी पर रह गई है। भारी ब्लास्टिंग से पक्के और कच्चे मकानों में दरारें पड़ रही हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने खदान से उड़ने वाली धूल और धुएं के कारण सांस संबंधी बीमारियों, दमा, आंखों में जलन और त्वचा रोग जैसी समस्याएं बढ़ने की बात भी कही है। इसके अलावा लंबित मुआवजा, रोजगार, बसाहट और पुनर्वास के मामलों पर भी नाराजगी जताई है।

ये हैं प्रमुख मांगें

भू-विस्थापितों ने कथित अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने, ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना नए कार्य शुरू नहीं करने, ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर मुआवजा देने तथा लंबित रोजगार एवं पुनर्वास प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है।

ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा, एसडीएम कटघोरा, पुलिस अधीक्षक कोरबा, तहसीलदार दीपका और थाना प्रभारी दीपका को भी भेजी गई है।

आंदोलनकारी महिलाओं ने कहा कि यदि मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो प्रस्तावित आंदोलन की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और शासन-प्रशासन की होगी।

ज्ञापन एवं विरोध में गोमती केंवट, कलश बाई पटेल, पांचो बाई पटेल, अगहन बाई महंत, इन्द्रा, आरती, गोदावरी बाई, सुरुज बाई, साधना खैरवार, सरस्वती पोर्ते, शीतला देवी, गीता, जानकी सिंह, प्रमिला, संगीता सारथी, उमा और अनीता पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल रहीं।