छोटी दीपावली की रात ट्रक का एक्सल टूटने से करीब 500 ट्रांसपोर्ट गाड़ियां फंसीं, 2016 के पत्र में मरम्मत-संधारण का उल्लेख, 2022 के बाद काम क्यों बंद हुआ? एसडीएम ने एसईसीएल से चर्चा कर निराकरण का दिया आश्वासन

सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़ 

(कोरबा) सरमा से कोरबी तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण ट्रांसपोर्ट चालकों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों को भी आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से सड़क की बदहाली झेल रहे वाहन चालकों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और उन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए खुद सड़क पर उतरना पड़ा।


जानकारी के अनुसार, छोटी दीपावली की रात करीब 10 बजे जर्जर सड़क पर एक ट्रक का एक्सल टूट गया, जिससे ट्रक बीच सड़क पर फंस गया। इसके कारण आवागमन बाधित हो गया और लगभग 500 ट्रांसपोर्ट गाड़ियां रुक गईं। इस घटना के बाद वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण भारी वाहनों का आवागमन मुश्किल हो गया था।


अगले दिन जब एसईसीएल एवं अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला, तो परेशान ट्रांसपोर्ट चालकों ने स्वयं जेसीबी मशीन मंगवाई और सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों को भरवाकर अस्थायी मरम्मत कराई। चालकों को मजबूरी में अपने स्तर पर यह व्यवस्था करनी पड़ी, ताकि सड़क पर आवागमन फिर से सुचारु हो सके।

कई बार खबरों के माध्यम से उठाया मुद्दा, फिर भी नहीं हुआ सुधार

ट्रांसपोर्ट चालकों का कहना है कि सरमा-कोरबी मार्ग की बदहाली को लेकर कई बार समाचारों के माध्यम से एसईसीएल एवं संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया गया, लेकिन इसके बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। लगातार परेशानी झेल रहे चालकों को आखिरकार खुद ही जेसीबी बुलाकर सड़क की मरम्मत करानी पड़ी। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क का संधारण कराया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

2016 के एसईसीएल के लिखित पत्र में मरम्मत एवं संधारण का उल्लेख

इस पूरे मामले में एसईसीएल का एक पुराना लिखित पत्र भी सामने आया है, जो अब कई सवाल खड़े कर रहा है। 10 मई 2016 को एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के कार्यालय से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता, रायपुर को भेजे गए पत्र में कोरबी-दरिमा-रानी अटारी मार्ग के संबंध में मरम्मत एवं संधारण का उल्लेख किया गया है।


पत्र में कहा गया है कि मार्ग के किलोमीटर 1 से 4 तक मरम्मत एवं संधारण का कार्य एसईसीएल द्वारा अनुमति प्राप्त होने पर कराया जाएगा। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि जब तक इस मार्ग से कोयला परिवहन होगा, तब तक एसईसीएल द्वारा सड़क की मरम्मत एवं संधारण का कार्य कराया जाता रहेगा। पत्र में यह भी बताया गया है कि रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदानों का कोयला इसी मार्ग से परिवहन होता है तथा इन खदानों की आयु 20 से 30 वर्ष बताई गई है।


ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब वर्ष 2016 में एसईसीएल द्वारा सड़क की मरम्मत एवं संधारण को लेकर लिखित रूप से उल्लेख किया गया था, तो वर्ष 2022 के बाद से इस मार्ग की नियमित मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? आखिर किसकी लापरवाही के कारण सड़क की यह स्थिति बनी हुई है? संबंधित अधिकारियों ने इस मार्ग के रखरखाव को लेकर क्या कदम उठाए? क्या एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों को इस जर्जर सड़क की जानकारी नहीं है या फिर इसकी अनदेखी की जा रही है? इन सवालों का जवाब अब संबंधित अधिकारियों को देना होगा।

एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने दिया जल्द निराकरण का आश्वासन

सड़क की बदहाली से परेशान वाहन चालकों ने अनुविभागीय अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा मनोज कुमार बंजारे से बातचीत कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। चालकों ने उन्हें सरमा-कोरबी मार्ग की जर्जर स्थिति, बड़े-बड़े गड्ढों और आवागमन में हो रही परेशानियों की जानकारी दी। इस पर मनोज कुमार बंजारे ने ग्रामीणों एवं वाहन चालकों की समस्या को देखते हुए आश्वासन दिया कि जल्द ही एसईसीएल के अधिकारियों से बातचीत कर सड़क की मरम्मत एवं समस्या का निराकरण कराया जाएगा।

ग्रामीणों और चालकों को स्थायी समाधान का इंतजार

सरमा-कोरबी मार्ग केवल ट्रांसपोर्ट वाहनों के आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क से भारी वाहनों के साथ छोटे वाहन, दोपहिया वाहन और पैदल चलने वाले लोग भी आवागमन करते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण सभी को परेशानी उठानी पड़ रही है।


एक ओर वाहन चालक खुद जेसीबी बुलाकर गड्ढे भरवाने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर एसईसीएल के पुराने पत्र में मरम्मत एवं संधारण का उल्लेख होने के बावजूद सड़क की वर्तमान स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब ग्रामीणों और ट्रांसपोर्ट चालकों की निगाहें एसईसीएल प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल साफ है कि आखिर कब तक लोग इस जर्जर सड़क की परेशानी झेलते रहेंगे? वर्ष 2016 के पत्र में किए गए उल्लेख के बावजूद वर्ष 2022 के बाद मरम्मत नहीं होने का कारण क्या है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और इस मार्ग की स्थायी मरम्मत कराई जाएगी?