धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा-बांकीमोंगरा) भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्रा के उपरांत एक सप्ताह के विश्राम के बाद माता सुभद्रा की वापसी पर शनिवार को बांकी मोंगरा में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। 

बांकी मोंगरा मुख्य चौक स्थित सिद्धिदात्री मंदिर से प्रारंभ हुई यात्रा बांकी कॉलोनी, सोमवारी बाज़ार, शांति नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जगन्नाथ मंदिर पहुंची, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यात्रा का समापन हुआ।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन माता सुभद्रा ने पुरी भ्रमण एवं अपनी मौसी के घर जाने की इच्छा व्यक्त की थी। भगवान जगन्नाथ एवं बड़े भाई बलभद्र उन्हें रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर (मौसी घर) ले गए, जहां तीनों देवता लगभग सात दिनों तक विराजमान रहे। इसके पश्चात उनकी वापसी यात्रा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। इसी परंपरा के आधार पर पुरी सहित देशभर में प्रतिवर्ष रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।

इसी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए उत्कल समाज द्वारा बांकी मोंगरा में भी माता सुभद्रा की वापसी यात्रा धूमधाम से निकाली गई। सुंदर एवं सुसज्जित रथ में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी रही। यात्रा के दौरान श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ भक्ति में सराबोर दिखाई दिए। बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य माना। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और भगवान से सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।


पूरे मार्ग में भक्ति, उत्साह और धार्मिक आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला। माता सुभद्रा की वापसी यात्रा ने नगर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन अविस्मरणीय बन गया।

माता सुभद्रा की घर वापसी के इस आयोजन को "बहुदा यात्रा" या "उल्टा रथ" के रूप में जाना जाता है।