पार्किंग व्यवस्था के अभाव में चोरी का खतरा, कोयला लदे ट्रकों की लंबी कतारों से दुर्घटना की आशंका

सदानंद कुमार प्रउहा सह-संपादक डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा)रविवार को कोरबी में लगने वाला साप्ताहिक बाजार आसपास के लगभग 40 से 45 गांवों के लोगों के लिए खरीदारी और व्यापार का प्रमुख केंद्र है। बाजार में सब्जी बेचने और खरीदने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ चिरमिरी, बैकुंठपुर, कटघोरा, मरवाही तथा गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र से भी व्यापारी और कारोबारी पहुंचते हैं। लेकिन बाजार के दिन बढ़ती भीड़, वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही और पार्किंग व्यवस्था के अभाव के कारण कोरबी चौक से लेकर सरमा-तनेरा-जलके मार्ग तक यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।

दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक बनी रहती है जाम की समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार, कोरबी चौक और बस स्टैंड से लगा बाजार क्षेत्र रविवार को इतना व्यस्त हो जाता है कि शाम होते-होते वाहनों की लंबी कतारें लगने लगती हैं। व्यापारी, कारोबारी, ऑटो रिक्शा तथा निजी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता रहता है।

कोरबी कटघोरा और चिरमिरी के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है। कोरबी से होकर सरमा, तनेरा और जलके मार्ग के जरिए पेंड्रा क्षेत्र की ओर भी आवाजाही होती है। ऐसे में बाजार के दिन जाम का असर केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों और व्यापारियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

बताया जाता है कि दोपहर लगभग 3 बजे से रात 10 बजे तक जाम की स्थिति बनी रहती है। शाम के समय समस्या और गंभीर हो जाती है। कई बार सड़क पर वाहनों की आवाजाही इतनी धीमी हो जाती है कि एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं के लिए भी रास्ता बनाना मुश्किल हो जाता है।


भीड़ और पार्किंग व्यवस्था के अभाव में चोरी का खतरा


बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ चोरी की घटनाओं को लेकर भी ग्रामीणों और व्यापारियों में चिंता बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बाजार में भीड़ का फायदा उठाकर चोरी करते हुए लोग पकड़े गए हैं। बाइक चोरी की घटनाओं को लेकर भी लोगों में आशंका बनी रहती है।


स्थानीय लोगों के अनुसार, चोरी की घटनाओं को लेकर कई बार कोरबी चौकी में शिकायतें की जा चुकी हैं। पुलिस ने भी ऐसे मामलों में कार्रवाई करते हुए कई लोगों को पकड़ा है। इसके बावजूद बाजार क्षेत्र में सुरक्षित पार्किंग और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों, व्यापारियों और कारोबारियों को अपने वाहनों तथा सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।


लोगों का कहना है कि बाजार में आने वाले लोगों के वाहनों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित पार्किंग स्थल होना चाहिए। साथ ही, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने तथा चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने की जरूरत है।


कोयला लदे ट्रकों की लंबी कतारों से दुर्घटना की आशंका


कोरबी-सरमा मार्ग पर रानी अटारी और विजय वेस्ट कोल माइंस से निकलने वाले कोयला लदे टेलर और ट्रकों की लंबी कतारें भी बाजार के दिनों में यातायात समस्या को और गंभीर बना देती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार से लगे मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही और कतारों के कारण सड़क पर जगह कम पड़ जाती है।


इस स्थिति में सवारियों से भरे ऑटो रिक्शा, बाइक और अन्य छोटे वाहनों को निकलने में काफी परेशानी होती है। भारी वाहनों के बीच से गुजरते समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों, यात्रियों और व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार के दिन भारी वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने, आवश्यकतानुसार यातायात नियंत्रण की व्यवस्था करने और बाजार क्षेत्र में छोटे वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की जरूरत है।


यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग


कोरबी के साप्ताहिक बाजार में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत बताई है। लोगों का कहना है कि बाजार के दिन वाहनों की पार्किंग, सब्जी विक्रेताओं की जगह और आवागमन के मार्ग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि व्यापार भी प्रभावित न हो और आम लोगों को जाम से राहत मिल सके।


जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से कोरबी चौक, बस स्टैंड तथा बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने, सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था करने, चोरी की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाने और कोयला लदे भारी वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की मांग की है।


जनहित का सवाल यह है कि जिस बाजार पर दर्जनों गांवों के लोग और कई क्षेत्रों के व्यापारी निर्भर हैं, वहां यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?