धनेश देवांगन बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ

(कोरबा)शारदीय नवरात्रि पर्व की पवित्रता, मर्यादा और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने जिला प्रशासन से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। संगठन के जिलाध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गरबा और दुर्गा पूजा पंडालों में शालीन परिधान, पारंपरिक लोक नृत्य और भक्तिमय वातावरण को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

ज्ञापन में कहा गया है कि नवरात्रि माता की आराधना और साधना का पावन पर्व है। ऐसे अवसर पर गरबा स्थलों और दुर्गा पंडालों में तेज आवाज वाले डीजे, द्विअर्थी व अश्लील फिल्मी गीतों तथा अमर्यादित नृत्यों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी करने चाहिए। संगठन ने पंचमी से विजयादशमी और विसर्जन तक पूरे आयोजन के दौरान मर्यादा बनाए रखने की अपील की है।

अलेक्जेंडर टोप्पो ने कहा कि यह पहल किसी के उत्साह पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और भावी पीढ़ी को पारंपरिक संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने महिलाओं के लिए लुगरा, पोलखा, कोसा व सूती साड़ी, सलवार-सूट और घाघरा-चोली जैसे पारंपरिक परिधानों को प्रोत्साहित करने की बात कही। वहीं पुरुषों और युवाओं के लिए कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता सहित पारंपरिक वेशभूषा अपनाने का आग्रह किया।

जवारा, सुआ, करमा और पंथी नृत्य को मिले प्राथमिकता

संगठन ने गरबा आयोजनों में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को प्रमुख स्थान देने की मांग की। जवारा नृत्य, सुआ, करमा और पंथी नृत्य के साथ मांदर-झांझ की थाप पर जस गीतों के आयोजन से भक्तिमय वातावरण बनाने पर जोर दिया गया।

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने उम्मीद जताई कि प्रशासन के सहयोग से नवरात्रि उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगे और प्रदेश की लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी।