घर-घर संपर्क कर शिक्षा के महत्व के प्रति किया जा रहा जागरूक, पांच बच्चों ने पुनः लिया विद्यालय में प्रवेश

कृष्णा पाण्डेय जिला ब्यूरो चीफ जीपीएम 

(गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही) कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में जिले में शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में यूनिसेफ की जिला समन्वयक सुश्री सरस्वती यादव द्वारा शाला त्यागी बच्चों को चिन्हित कर उनके घर जाकर बच्चों एवं पालकों से संपर्क किया जा रहा है तथा उन्हें शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

इस पहल के सकारात्मक परिणामस्वरूप ग्राम गोर्राटिकरा की दिलेश कुमारी एवं ललिता, लिखन टोला की कुमारी सुमन तथा देवराज पारा के प्रीतम सिंह एवं राहुल सिंह ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा में पुनः प्रवेश लिया है और अब नियमित रूप से विद्यालय आने लगे हैं। आज यूनिसेफ की जिला समन्वयक सुश्री सरस्वती यादव ने बच्चों को स्कूल बैग वितरित कर उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने तथा मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

घर-घर संपर्क के दौरान बच्चों एवं पालकों को विशेष रूप से बालिका शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।   

     बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनने, रोजगार अथवा व्यवसाय के अवसरों का लाभ उठाने तथा समाज में लड़के और लड़कियों के बीच व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शाला त्यागी बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने में शिक्षक संजय सिंह राजपूत, दिनेश सिंह पैकरा एवं हरीश शंकर शर्मा तथा यूनिसेफ की जिला समन्वयक सरस्वती यादव का विशेष सहयोग रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने पुनः विद्यालय में प्रवेश लेने वाले बच्चों को बधाई देते हुए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने और अच्छे अंकों से सफलता प्राप्त कर अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए शुभकामनाएं दीं।

100 विद्यालयों में संचालित है बालिका शिक्षा कार्यक्रम

जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से जिले के 100 माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बालिका शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं में लिंग संवेदनशीलता, मानसिक स्वास्थ्य, वित्तीय साक्षरता तथा 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों का विकास करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में शाला त्यागी बच्चों के घर निरंतर संपर्क कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य लगातार जारी है।