देवेन्द्र कुमार खूंटे रिपोर्टर कोरबा डीएम इंडिया न्यूज़ 

(कोरबा)विद्या अध्ययन के साथ विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य के साथ 17 सितंबर को इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईटी) कोरबा महाविद्यालय में भगवान विश्वकर्मा एवं भगवान श्रीगणेश की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना की गई।

महाविद्यालय परिसर में आयोजित पूजन कार्यक्रम में स्टाफ सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, ज्ञान एवं संस्थान की उन्नति की कामना की गई। इस दौरान विद्यार्थियों और स्टाफ को भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से भी अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में प्रकृति और सृजन के प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है। पेड़-पौधे, नदियां, पर्वत सहित विभिन्न प्राकृतिक तत्वों के प्रति सम्मान हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी परंपरा के तहत भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष रूप से की जाती है।


भगवान विश्वकर्मा को भारतीय परंपरा में सृजन, निर्माण, शिल्प एवं वास्तुकला का देवता माना जाता है। वहीं भगवान श्रीगणेश को ज्ञान, बुद्धि और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। महाविद्यालय में दोनों देवताओं की पूजा एक साथ किए जाने से धार्मिक आस्था के साथ विद्यार्थियों को संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर मिला।


पूजन कार्यक्रम में प्रोफेसर के.सी. सुनहरे, असिस्टेंट प्रोफेसर सुनीता पांडेय, लालिमा जायसवाल, गोपाल राठौर, सीताराम जांगड़े, शैल वर्मा, कामेश देवांगन, महेंद्र माहेश्वरी, अमोली साहू सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।