बैरिकेड हटाकर खोला रास्ता? हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन—प्रशासन या लापरवाह व्यवस्था?


अमर भारद्वाज सह-स्टेट हेड छत्तीसगढ़ डीएम इंडिया न्यूज़

(कोरबा) तरदा-उरगा मुख्य मार्ग पर ग्राम कुदुरमाल के पास हसदेव नदी पर बना पुराना पुल इन दिनों बड़े हादसे को न्योता देता नजर आ रहा है। पुल की जर्जर और क्षतिग्रस्त हालत को देखते हुए यहां आवागमन प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद वाहन लगातार गुजर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रतिबंध के बाद भी इस पुल पर यातायात कैसे जारी है और यदि कोई बड़ा हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

बताया जा रहा है कि पुल की स्थिति को देखते हुए दोनों ओर बैरिकेड लगाए गए थे। रास्ता बंद करने के लिए मिट्टी डंप करने के साथ अन्य अवरोध भी बनाए गए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवरोधों को हटाकर पुल से आवागमन का रास्ता फिर खोल दिया गया है।

मौके की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो फिर प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा रहा? जर्जर पुल से मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहनों के अलावा अन्य वाहनों की आवाजाही लोगों की जान को सीधे खतरे में डाल रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पुल का दोबारा तकनीकी निरीक्षण कराकर दोनों ओर मजबूत बैरिकेडिंग की जाए और प्रतिबंधित पुल पर किसी भी वाहन की आवाजाही पूरी तरह रोकी जाए।

अब सवाल सिर्फ पुल की मरम्मत का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी की सुरक्षा का है।